डोईफोड़िया क्षेत्र में किसान खेत की मेढ़ या बीच में लगे पेड़ो को हटाने के लिए अपना रहे यह तरीका
भास्कर संवाददाता | डोईफोड़िया
किसान अपने स्वार्थ पूर्ति के लिए खेत की मेढ़ पर या खेत के बीच में लगे पेड़ हटाने के लिए नया तरीका अपना रहे हैं। पेड़ को काट नहीं सकते। वन विभाग से अनुमति लेने में समय लगता है। इसलिए पेड़ हटाने के लिए तने में हींग और केमिकल डालकर कमजोर कर रहे हैं। पहले पेड़ को नीचे से चारों ओर से काट दिया जाता है। इसके बाद कैमिकल और हींग लगा देते हैं। पेड़ कमजोर होने पर तेज हवा चलने से गिर जाते हैं। इब तक कई पेड़ इस तरह हटाए जा चुके हैं। वन विभाग को ध्यान देने की जरूरत है।
हिंग और केमिकल लगाने से पेड़ जलने लगता है। तेज धूप में आग भी लग जाती है। हिंग और केमिकल डालने के बाद 10 से 15 दिन में पेड़ जलकर गिर जाता है। 5 या 10 दिन बाद पेड़ की लकड़ी काटकर हटा देते है। खकनार तहसील से 5 किलोमीटर दूरी पर ग्राम धाबा और कारखेड़ा में अब तक 40 से ज्यादा और अन्य पेड़ों को जलाया गया है। खकनार के लिए राजस्व और वन विभाग के अफसर हर दिन आवाजाही कर रहे हैं। पेड़ो की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। क्षेत्र में हरे भरे पेड़ काटे जा रहे है। सरकार हरियाली को बढ़ावा देने के लिए योजनाओं के माध्यम से पेड़ लगवा रही है। जमीन पर अफसरों की लापरवाही के कारण राशि का दुरुपयोग हो रहा है।
पौधारोपण के बाद लापरवाही
पिछले साल पंचायत से लेकर वन विभाग को लाखों पौधे लगाने के लिए करोड़ो रुपए दिए गए। पंचायत स्तर तक पौधे गए थे। इसमें पौधे की देखरेख और पानी देने के लिए रोज 200 रुपए के हिसाब से मजदूर भी लगाए गए लेकिन खकनार ब्लॉक में हजारों पौधे सूख गए। पौधे लगाने के बाद पंचायत स्तर के कर्मचारी और अफसरों ने ध्यान नहीं दिया। केवल गड्ढे रह गए है। कई पेड़ सूख गए तो कई मवेशी खा गए। पौधा रोपण कर रिकार्ड बनाया लेकिन बचाया नहीं।
हिंग और केमिकल से पेड़ जलाकर हटाए जा रहे है।