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कुपोषण से बालिका की मौत, भाई भी बीमार दादा बोले- एनआरसी में नहीं मिलता खाना

3 वर्ष पहले
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कुपोषण के लिए बदनाम आदिवासी ब्लाक खालवा के गांव चिकलतलाई में चार दिन पहले चार साल की एक बालिका की मौत हो गई। उसका भाई भी बीमार है। दादा बालशक्ति केंद्र नहीं भेज रहा है। दादा का कहना है कि केंद्र पर भोजन तक नहीं मिलता है। बालिका एक साल से बीमार थी। उसे बाल शक्ति केंद्र भी लाया गया था, लेकिन लगातार ध्यान नहीं देने के कारण वह स्वस्थ नहीं हो सकी।

6 अप्रैल को बालिक को खालवा बाल शक्ति केंद्र लाए लेकिन शाम को ही घर ले गए। तबियत बिगड़ने पर फिर कार्यकर्ता खालवा लाए। खंडवा रैफर कर दिया गया। यहां 11 अप्रैल को उसकी मौत हो गई। बालिका का 15 माह का भाई भी कुपोषण से पीड़ित है। उसके दादा ने गंभीर आरोप लगाते कहा खाना-पीना नहीं मिलने से मेरी पोती कमजोर होकर मर गई। बालिका जमुना पिता फकीरा (4) को एक साल पहले भी बाल शक्ति केंद्र खालवा में भर्ती कर 14 दिन बाद छुट्‌टी दी गई थी। तबियत फिर बिगड़ी तो परिजन टोने-टोटके से इलाज कराते रहे। कार्यकर्ता को पता चला तो उसने खालवा में भर्ती कराया। बालिका के परिजन शाम को फिर चिकतलाई लौट गए।

कागजों में 20 बच्चे बेहद गंभीर, भर्ती सिर्फ 4

आंगनवाड़ी केंद्रों पर बहुत कम बच्चे आ रहे हैं। उपस्थिति 70 से 80 फीसदी बताई जा रही है। विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार अति कम वजन वाले बच्चों की संख्या 500 से ज्यादा है। बेहद गंभीर बच्चे जिन्हें बाल शक्ति केंद्र लाने की आवश्यकता है उनकी संख्या 20 बताई है। इसके बावजूद केंद्र में भर्ती बच्चों की संख्या मात्र 4 ही है।

प्रतिवेदन मांगूंगा

कार्यकर्ता ने बच्ची की बीमारी का पूरा फॉलो किया था। इसके बाद भी खालवा परियोजना अधिकारी से प्रतिवेदन मांगूंगा। विभागीय लापरवाही मिली तो कार्रवाई की जाएगी। -संजय भारद्वाज, जिला परियोजना अधिकारी महिला बाल विकास खंडवा

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