चार सौ साल बाद शुक्रवार को बड़ा भाणुजा के भगवान लक्ष्मीनारायण का चारभुजानाथ से मिलन हुआ। 44 श्रेणी के 140 और 24 श्रेणी के 52 गांवों के पालीवाल समाजजन इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। मेवाड़ की शौर्य धरा हल्दीघाटी से 15 किमी दूर बड़ा भाणुजा से भगवान लक्ष्मीनारायण के श्रीविग्रह को पालकी में विराजित कर श्रद्धालु शाही लवाजमे के साथ दोपहर एक बजे खमनोर के लिए रवाना हुए। दर्शनों को आतुर भक्तों ने पूरे रास्ते पुष्पवर्षा की। ठाकुरजी को श्रीफल-प्रसाद चढ़ाया और मत्था टेककर परिवार की सुख-समृद्धि मांगी। इधर, खमनोर में चारभुजानाथ के श्रीविग्रह को मंदिर के गर्भगृह से निकालकर कस्बे की सीमा पर लक्ष्मीनारायण प्रभु से मिलन करवाया। शाम पौने चार बजे ठाकुरजी की पालकी के आने पर छोगाला-छैल के जयकारों से जयकारे गूंज उठे।
खमनोर . बड़ा भाणुजा के भगवान लक्ष्मीनारायण का चारभुजानाथ से मिलन हुआ। दोनों ठाकुरजी को छप्पन भोग धराया (बाएं) शोभायात्रा में उमड़े श्रद्धालु।
बंदूकों से सलामी दी, रास्तेभर पुष्पवर्षा
24 और 44 श्रेणी पालीवाल समाज के महासम्मेलन पर लक्ष्मीनारायण प्रभु के पधारने और चारभुजानाथ से मिलन की रस्म के बाद वाटिका में आरती उतारी गई। कुछ देर विश्राम के बाद भगवान नगर भ्रमण पर निकले। शोभायात्रा में सबसे आगे हाथी, ऊंट, घोड़े, रथ और इसके पीछे महिलाएं कलश थामे शामिल हुईं। ये मंगल गीत गा रही थीं। ब्रह्मशक्ति मेवाड़ के ढाई हजार युवा डीजे, बैंड-बाजों पर भक्ति गीतों की धुनों और मंदसौरी ढोल की थाप पर रास्तेभर थिरकते चले। ठाकुरजी को बंदूकों की सलामी दी। जोरदार आतिशबाजी भी की गई। डाबुन रोड से रवाना होकर शोभायात्रा बस स्टैंड, प्रताप तिराहा, मेघवाल बस्ती, लोहारों की घाटी, लखारा मोहल्ला, तहसील रोड, बड़ा चौराहा, सदर बाजार, सोनी मोहल्ला, इंद्रा चौक, ब्रह्मपुरी होते हुए चारभुजानाथ मंदिर के पास वाटिका में पहुंची।
स्वर्णाभूषणों से प्रभु के स्वरूपों का शृंगार
लक्ष्मीनारायण भगवान और चारभुजानाथ का सेवकों ने स्नान करा इत्र, चंदन तिलक लगाए। चांदी की ढाल-तलवार, बांसुरी, ललाट पर सोने के आभूषण, मुकुट, कानों में कुंडल, गले में मोतियों के हार तथा आकर्षक वस्त्रों से शृंगार किया। दोनों ठाकुरजी को छप्पन भोग धराए गए। संध्या काल में श्रद्धालुओं ने ढोल-नगाड़ों के साथ चंवर ढुलाए। ठाकुरजी की महाआरती की गई। ठाकुरजी की अगवानी में व्यापार मंडल, सामाजिक संगठनों और अन्य समाज के लोगों ने स्वागत द्वार लगाए। श्रद्धालुओं के लिए कस्बेवासियों ने रास्ते में कई जगहों पर छाछ-लस्सी, शर्बत और ठंडे पानी की व्यवस्था की।
शोभायात्रा में संतों ने आशीर्वाद दिया
शोभायात्रा में सूरजकुंड (कुंभलगढ़) के चैतन्य ब्रह्मचारी अवधेशानंद महाराज, देवल आश्रम सरसूनिया और मुंबई स्थित गुलाबनाथ बापू गोरक्षधाम के महंत हरिनाथ महाराज, खमनोर के कैलाश टेकरी आश्रम के संत ज्ञानानंद महाराज, अरावली की कंदराओं में स्थित भमराज की धुणी के संत उदयगिरी महाराज और सलोदा के तट स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर के संत ज्वालानाथ महाराज विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। लोगों ने संतों का आशीर्वाद लिया। संभाग सहित मुंबई, पूना, अहमदाबाद, सूरत, इंदौर सहित देश के कई शहरों से प्रवासी पालीवाल समाजजन महोत्सव में शामिल हुए।