24-44 श्रेणी पालीवाल ब्राह्मण समाज के महासम्मेलन के दूसरे दिन भावी पीढ़ी को शिक्षा और संस्कार देने पर मंथन हुआ। नवाचारों को अमल में लाने और समाज की धारा में शामिल करने के लिए नीति निर्माण समिति का गठन किया। दोनों श्रेणियों के लोगों ने संयुक्त जाजम पर समाजोत्थान की बात करते हुए आर्थिक, राजनैतिक और सामाजिक तौर पर संगठित होने और मजबूत बनने पर भी चर्चा की। कार्यकर्ताओं और सहयोग देने वालों का सम्मान किया। दोपहर बाद लक्ष्मीनारायण प्रभु और महोत्सव में पधारे संतों को विदाई दी। सुबह ग्यारह बजे शुरू सामाजिक चर्चा में पालीवाल समाज की दोनों श्रेणियों के वरिष्ठजनों ने विचार रखे। वरिष्ठजनों ने राजसमंद में जिला मुख्यालय पर समाज के छात्रावास के लिए अब तक के प्रयासों की जानकारी दी। समाजजनों ने नगरपरिषद के सभापति सुरेश पालीवाल को छात्रावास निर्माण के लिए जगह दिलवाने का आग्रह किया। इस पर सभापति ने जल्दी ही जमीन उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया। समाजजनों ने समाज के छात्र-छात्राओं को अच्छी शिक्षा और संस्कार देने की जरूरत बताई। संस्कार शिविर करने और समाज के बालक-बालिकाओं में शुरू से ही गुणों का विकास करने पर भी चर्चा की। राजनैतिक क्षेत्र में काम करने वाले समाज के लोगों ने मेवाड़ में अधिक संख्या में होने के बाद भी उपेक्षा होने का मुद्दा उठाया। समाज सुधार के मसलों पर विचारकों ने कहा कि वैवाहिक और मांगलिक कार्यक्रमों में अधिक खर्च से कमजोर परिवारों का आर्थिक पतन हो रहा है। इससे समाज आर्थिक रूप से दो हिस्सों में बंट रहा है। कमजोर तबके को उठाने के लिए सामूहिक विवाह जैसी अवधारणा को लागू करना आवश्यक बताया। 44 श्रेणी के जमनालाल पालीवाल ने दोनों श्रेणियों के सामूहिक विवाह कार्यक्रम का खर्च वहन करने की घोषणा की। इस पर 24 और 44 श्रेणियों के 11-11 समाजजनों और ब्रह्मशक्ति मेवाड़ संगठन के 11 युवाओं और मार्गदर्शकों सहित 41 सदस्यों की संयुक्त कमेटी का गठन किया। कमेटी आने वाले दिनों में शिक्षा, संस्कार और वैवाहिक कार्यक्रमों के लिए नीति निर्धारण का काम करेगी। सम्मेलन में 44 श्रेणी पालीवाल समाज अध्यक्ष धर्मनारायण पुरोहित, ब्रह्मशक्ति मेवाड़ के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेश पालीवाल, ग्राम सचिव संघ जिलाध्यक्ष राजेश पालीवाल, सभापति सुरेश पालीवाल, श्रीकृष्ण पालीवाल, आयोजन समिति के रामचंद्र पालीवाल, श्रवण जोशी, भानू पालीवाल, विनोद, मेवाड़ ब्राह्मण महासभा उपाध्यक्ष जगदीश दवे सहित वक्ताओं ने विचार रखे।
लक्ष्मीनारायण जी प्रभु को दी विदाई, ठाकुरजी के श्रीविग्रह स्वरूपों को अपने-अपने गांव के मंदिरों में विराजित कराया
सुदामा-कृष्ण मिलन ने मोहा
रात्रि जागरण की शुरुआत जगदीश वैष्णव ने गजानन स्तुति से की। तेरी लीला है निराली शंकर भोलेनाथ..., जबरा जंगल में बैठी आवरा माता..., आज म्हारा भोला बाबा भांग घणी पीदी सहित कृष्ण भक्ति से जुड़े भजन गाए। महाकाल की भस्मारती और कृष्ण -सुदामा के प्रसंग ने मन मोहा। लोगों को रात तक बांधे रखा।