पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • जंग लगी ट्रे में जमा रहे बर्फ, जिले में चल रही 8 फैक्टरियों में से किसी के पास एफएसएसएआई का लाइसेंस तक नहीं

जंग लगी ट्रे में जमा रहे बर्फ, जिले में चल रही 8 फैक्टरियों में से किसी के पास एफएसएसएआई का लाइसेंस तक नहीं

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
हमको लाइसेंस नहीं लगता है। कोई आइसक्रीम, गोला और लस्सी के लिए बर्फ ले जाता है तो यह हमारी जिम्मेदारी नहीं है। हमारे पास एफएसएसएआई और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का प्रमाण पत्र है। -कुलदीप सिंह, संचालक गुरुकृपा/ राजपाल आइस फैक्ट्री

लस्सी, आइसक्रीम, गन्ने का रस, फालूदा, बर्फ का गोला बनाने में हो रहा उपयोग

प्रशांत शर्मा | खंडवा

बर्फ के गोले, गन्ने का रस और अन्य तरह के पेय पदार्थों को इन दिनों हम बड़े उमंग से खा रहे हैं, लेकिन जब इसकी हकीकत देखोगे तो चौक जाओंगे। लोहे के जंग लगे और गंदे ट्रे में फैक्ट्रियों द्वारा बर्फ जमाई जा रही है। और तो और कुछ जगह तो बर्फ बनाने में उपयोग होने वाला पानी गंदे कुएं से सप्लाई हो रहा है। कुल मिलाकर खुले में बिकने वाले शीतल पेय पदार्थों में बीमारी परोसी जा रही है।

खास बात तो यह भी है कि जिले में 8 आइस फैक्ट्रियां हैं, लेकिन छह फैक्ट्री संचालकों के पास फूड एंड स्‍टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) के लाइसेंस ही नहीं है। जबकि बगैर लाइसेंस फैक्ट्री संचालन पर छह महीने की सजा और पांच लाख रुपए का जुर्माना तक लग सकता है। हालांकि अभी तक आधे से अधिक सीजन बीत गया है, लेकिन किसी भी फैक्ट्री में जांच नहीं की गई। भास्कर ने ऐसी ही कुछ फैक्ट्रियों की पड़ताल की तो यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। -पढ़िए रिपोर्ट

ये देखिए... जंग लगे लोहे के ट्रे में ऐसे जमा रहे हैं बर्फ, पानी भी गंदे कुएं का कर रहे हैं उपयोग

राजपाल (गुरुकृपा) आइस फैक्टरी, इंदौर रोड

दोपहर के 1 बजे थे। जैसे ही फैक्टरी में प्रवेश किया तो लोहे के ट्रे जिसमें बर्फ बनाया जाता है, उस पर मैले-कुचैले बोरे डले थे। एक कर्मचारी नंगे पांव बगैर ग्लब्स पहने बर्फ के जमाव को चैक कर रहा था। जैसे ही उसने एक ट्रे को ऊपर उठाया उस पर लगा जंग स्पष्ट दिखने लगा। जब रिपोर्टर ने पूछताछ करना शुरू की कर्मचारी ने निजी क्षेत्र में बगैर मालिक की अनुमति प्रवेश पर एतराज जताया। हम जैसे-जैसे अंदर घुसते गए, जंग लगी व्यवस्था और गंदगी सामने आती गई। गौरतलब है यहां का बर्फ बसस्टैंड स्थित राजपाल आइस शॉप से शहरभर में सप्लाई होता है।

1 जून से अखाद्य बर्फ का रंग होगा नीला

1 जून 2018 से सफेद के साथ गैर-खाद्य बर्फ का रंग नीला होगा। एफएसएसएआई ने फैसला किया है कि बर्फ का रंग नीला करने के लिए फैक्ट्री संचालकों को अखाद्य बर्फ में फूड कलर इंडिगो केरामाइन या ब्रिलियंट ब्लू को 10 पीपीएम तक मिलाना होगा। औद्योगिक प्रयोजनों के लिए नीले रंग के रंग का उपयोग करने का फैसला किया, जबकि खाद्य बर्फ को क्रिस्टल स्पष्ट दिखना चाहिए।

कश्मीर आइस फैक्ट्री, पंधाना रोड

दोपहर 11.45 बजे खंडवा-पंधाना मेन रोड से सटे कश्मीर आइस फैक्टरी के सामने जंग लगी आइस ट्रे रखी हुई थी। फैक्टरी के गेट पर बैठे कर्मचारी से जब हमने बर्फ जमाने की तकनीक पूछी तो वह बोला मालिक से बात करो। तभी फैक्टरी के अंदर जाने दूंगा। लेकिन बार-बार फैक्टरी के मालिक का नंबर मांगने पर भी कर्मचारी ने मोबाइल नंबर नहीं दिया। फैक्टरी के सामने एक कुआं है, इसी के पानी से बर्फ बनाया जाता है। जब हमने कुएं में झांककर देखा तो पानी के ऊपर जगह-जगह काई जमी थी।

हमारी फैक्ट्री 40 साल पुरानी है। मांस, मछली, आइसक्रीम, कुल्फी वालों को बर्फ की सप्लाई करते हैं। औद्योगिक विभाग में लाइसेंस के लिए आवेदन किया है। एफएसएसएआई लाइसेंस नहीं है। -बरकत अली, संचालक, कश्मीर आइस फैक्ट्री

रोज होती है 15 टन बर्फ की खपत

शहर में रोज 15 टन बर्फ की खपत होती है। 80 किलोग्राम की एक सिल्ली 400 रुपए में मिलती है। बर्फ का उपयोग लस्सी, आइसक्रीम, गन्ने का रस, फालूदा, बर्फ का गोला बनाने के साथ होटलों में नार्मल पानी में मिलाकर ग्राहकों को पिलाने में होता है।

लाइसेंस नहीं होने पर 6 माह की सजा, 5 लाख का जुर्माना

खाद्य सुरक्षा व मानक अधिनियम- 2006 के तहत खानपान से जुड़े सभी संस्थानों को एफएसएसएआई लाइसेंस लेना अनिवार्य है। बिना इसके कारोबार करते पकड़े जाने पर अधिनियम के तहत 6 माह की सजा और पांच लाख जुर्माना का प्रावधान है।

लाइसेंस जरुरी

एफएसएसएआई लाइसेंस जरूरी है। शहर के पास 3 बर्फ फैक्टरियां हैं। बगैर लाइसेंस बर्फ बन रही है तो कार्रवाई होगी। -केएस सोलंकी, खाद्य एवं औषधीय प्रशासन अधिकारी

खबरें और भी हैं...