नवतपा की शुरुआत 25 मई से होगी। रोहिणी नक्षत्र में सूर्य के प्रवेश करने पर नवतपा खूब तपेगा। सूर्य इस दिन दोपहर 2:36 बजे रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेगा। ग्रह गोचर की स्थिति बता रही है रोहिणी खूब तपेगी। इसका असर वर्षा में दिखाई देगा। पं. अंकित मार्कंडेय के अनुसार उत्तम वृष्टि होगी। इससे धान्य उत्पादन की स्थिति श्रेष्ठ रहेगी। सूर्य वृषभ राशि तथा रोहिणी नक्षत्र में संचरण करते हैं, तब वर्षा ऋतु के बनने का समय होता है।
25 मई को दोपहर 2.36 बजे रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेगा सूर्य, बारिश में िदखेगा असर
शुक्र है स्वामी, इसमें सूर्य परिभ्रमण से पैदा करता है तपिश
भारतीय ज्योतिष शास्त्रीय के अनुसार वृषभ राशि का स्वामी शुक्र है। इस राशि में सूर्य का परिभ्रमण तपिश पैदा करता है। इससे रोहिणी में भीषण गर्मी पड़ती है। सूर्य देव के वृषभ राशि व रोहिणी नक्षत्र में परिभ्रमण के 13 दिन इसकी दिशा तथा वास के आधार पर वर्षा ऋतु की स्थिति का बोध कराते हैं। ग्रह गोचर की स्थिति के अनुसार इस बार उत्तम वर्षा के संकेत नजर आ रहे हैं। इसका असर मध्यम वृष्टि तथा धान्य उत्पत्ति की दृष्टि से श्रेष्ठ है। समय का निवास वैश्य के घर वर्षा ऋतु कब व कैसी होगी, इसका निर्धारण समय का निवास तथा वाहन के आधार पर होता है। इस बार समय का निवास वैश्य के घर है तथा वाहन अश्व है। संवत्सरी गणना से देखें तो यह स्थिति समय अनुकूल उत्तम वृष्टि का निर्माण करेगी। इससे पृथ्वी पर जल की परिपूर्णता रहेगी। मेघों की कृपा बरसेगी। उत्तम वृष्टि के लिए मेघों का अनुकूल होना भी मायने रखता है। शास्त्रीय गणना में 9 प्रकार के मेघ तथा 4 प्रकार के उप मेघ बताए गए हैं। इस बार वर्षाकाल में नव मेघों में दोण नाम का मेघ रहेगा, जो उत्तम वृष्टि तथा श्रेष्ठ धान्य उत्पादन की स्थिति निर्मित करेगा। चार उपमेघों में पुष्कर नामक मेघ की मौजूदगी रहेगी, जो देश प्रदेश में वर्षा की समान स्थिति का निर्माण करेगा।