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वध से पहले व बाद में जरूरी है डॉक्टर की जांच, फिर भी बगैर जांच के कत्लखानों में काटे जा रहे थे गोवंश

3 वर्ष पहले
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इमलीपुरा में कत्लखानों पर हुई कार्रवाई के बाद इस मामले में नई-नई परतें खुल रही हैं। जिन कत्लखानों में गोवंश के वध से पहले और बाद में डॉक्टरों की जांच जरूरी है, लेकिन ऐसा होता ही नहीं था। अगर गोवंश स्वस्थ है तो डॉक्टरों की टीम निगम को लाइसेंस धारी कसाई को वध करने की अनुमति देने का प्रमाण पत्र देते हैं, लेकिन पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई में एक साथ 10 हजार खालें जब्त होने से स्पष्ट है कि कत्लखानों में गाेवंश की हत्या में निगम के कर्मचारी-अफसर, डॉक्टर यहां तक कि पुलिस विभाग के कुछ अफसर भी गैरजिम्मेदार बने रहे। मामले में डॉक्टरों से चर्चा की तो एक ने नियम से कार्यवाही करना बताया, जबकि प्रभारी डाॅक्टर जवाब नहीं दे पाए।

इमलीपुरा में गोवंश के अवैध कारोबार को लेकर पुलिस ने मंगलवार तक 8 प्रकरणों में 60 लोगों को आरोपी बनाया है। जिनमें आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। मामले में नगर निगम, कुछ पुलिसकर्मी व पशु अस्पताल के डॉक्टरों की भूमिका संदिग्ध लग रही है। जिसकी जांच जिला प्रशासन व पुलिस द्वारा की जा रही है। नियम के मुताबिक डॉक्टरों की जांच के बाद वैध कारोबारियों ने ही पिछले तीन सालों में करीब 6 हजार गोवंश काट दिए। जबकि अवैध कारोबारियों का रिकार्ड निगम के पास नहीं है।

नियमों की धज्जियां उड़ाती तस्वीर... डॉक्टर िकतनी ईमानदारी से काम करते थे, फोटो बयां कर रहा है।

नियम : बाजार में मांस बेचने का प्रमाण पत्र देना पड़ता है

पशु चिकित्सक की देखरेख में स्लाटर हाउस चलेगा और वह पशुओं के परिवहन, स्लाटर, स्टोरेज एवं लोकल उपयोग या एक्सपोर्ट अधिनियमों एवं नियमों के अनुरूप कार्य कराएगा। जो कार्य नियम विरुद्ध होगा उसे रुकवाएगा।

फूड सेफ्टी, जिला पंचायत, नगर निगम, नगर पंचायत, नगर परिषद आपस में समन्वय बनाकर पशुवध करने एवं मांस के क्रय-विक्रय का लाइसेंस देगा।

पशु चिकित्सक द्वारा पहले और बाद की जांच के बाद ही पशु वध का कार्य होगा। पीएम रिपोर्ट के बाद मांस को बाजार में बेचने का प्रमाण पत्र देना होगा।

जहां पशु वध होगा, उस स्थान का पंजीकरण होना आवश्यक है।

वध किए जाने वाले पशुओं का स्वास्थ परीक्षण 24 घंटे पूर्व किया जाएगा।

मांस की दुकान में 5 फिट की ऊंचाई तक टाइल्स लगी हो व पक्का फर्श, साफ सफाई होना जरुरी है।

दुकान के सामने गेट पर चिक तथा काले शीशे का दरवाजा लगा हो, दुकान के अंदर पशु, बकरा या पक्षी, मुर्गा नहीं काटा जाए।

दुकान में डीप रेफ्रीजरेटर होना आवश्यक है, जिसमें कटा हुआ तैयार मांस बिकने के लिए रखा जाएगा।

दुकान में वेन्टीलेशन लगा हो तथा एग्जास्ट फैन भी लगा हो, ढक्कन वाले कूड़ेदान की भी व्यवस्था होनी चाहिए। सभी उपकरण औजार एवं दुकान की धुलाई प्रत्येक दिन गर्म पानी से होना आवश्यक है।

2 साल पहले 800 गोवंश जब्त किए थे

मोघट पुलिस के अनुसार साल 2016 में पुलिस ने 8 प्रकरणों में इमलीपुरा सहित आसपास के क्षेत्रों से अवैध परिवहन करते करीब 800 गोवंश जब्त किए थे। जबकि वर्तमान में पुलिस को बड़ी कार्रवाई में मात्र 12 गोवंश ही मिले।

28 दुकानों में 10 दुकानें लाइसेंसी

इमलीपुरा क्षेत्र में प्रशासन की दबिश में 28 दुकानें ऐसी निकली जहां पर कत्लखाने थे। नगर निगम के रिकार्ड में इनमें से 10 कारोबारी ऐसे हैं जो जिनके पास स्वस्थ मवेशियों को काटने व मांस बेचने का लाइसेंस है। जबकि 18 कत्लखाने अवैध हैं।

दो वाहनों से 24 पाड़े जब्त: मोघट पुलिस ने सोमवार रात गोवंश का अवैध परिवहन करते दो वाहनों को पकड़कर उनमें क्रूरतापूर्वक ठूंसकर भरे गए 24 पाड़े व वाहन क्र. एमपी- 42जी-2310 व एमपी-37जीए-1137 जब्त किए। वहीं आरोपी सईद पिता रईस निवासी आष्टा सिहाेर, अकील पिता शब्बीर निवासी आष्टा को गिरफ्तार किया

बोले जिम्मेदार

सारे काम नियम से करते हैं

निगम द्वारा लाइसेंस प्राप्त कारोबारियों के ही मवेशियों की जांच करते हैं। जांच में जो मवेशी स्वस्थ होता है उसे ही काटने की अनुमति देते हैं। सारे काम नियम से करते हैं, काेई अनियमितता नहीं की। -डॉ. अक्षय निगम, पशु चिकित्सक

परिवार के साथ हूं, कल बात करूंगा

आपको जो भी जानकारी चाहिए मैं कल दे पाऊंगा। अभी परिवार के साथ हूं, सुबह बात करते हैं। -डॉ. नवीन तिवारी, प्रभारी व पशु चिकित्सक

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