पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • घड़ियां बदलीं, फिर बंद हो गईं, नहीं बदला तो शहर का समय

घड़ियां बदलीं, फिर बंद हो गईं, नहीं बदला तो शहर का समय

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
खंडवा | कहा जाता है कि एक घड़ी वो होती है जो आदमी को समय बताती है। एक घड़ी वो होती है जो आदमी का समय बताती है। यह घडिय़ां शहर का समय बता रहीं हैं। दुकान के बाहर खंभे पर चर चल रही घड़ी शहर में अव्यवस्था का समय बता रही है तो घंटाघर की बंद घडिय़ां शहर के विकास की स्थिति बता रहीं हैं। सबकुछ थमा हुआ सा है। सड़क पर लगे बिजली और टेलीफोन खंभों तक लगीं दुकानें, सड़कों पर अस्तव्यस्त यातायात, प्रत्येक रोड पर अतिक्रमण हैं। सत्तापक्ष के सांसद यहीं से हैं। विपक्ष के प्रमुख पदाधिकारी भी यहां से सांसद रहे। शहर सहित जिले के चारों विधायक सत्तापक्ष के। निगम में सत्तापक्ष भी सत्तापक्ष। सबकुछ अनुकूल होने के बावजूद शहर के हालात प्रतिकूल बने हुए हैं।

घंटाघर पर लगाई गई घड़ियां बंद हो गई है।

नगर निगम के सामने दुकान की घड़ी टेलीफोन खंभे पर टंगी है और घंटाघर की घड़ी बंद है।

मुनि प्रणाम सागर ने बताया था कि बंद घड़ी से बिगड़ रहा वास्तु

जैन संत मुनि प्रणाम सागर ने 5 साल पहले शहर के हृदय स्थल घंटाघर पर बंद घडिय़ों के लिए अशुभ बताया था। उन्होंने कहा हृदय पूरे शरीर को संचालित करता है। उसे पुष्ट व तंदरुस्त रखता है। शहर के बीचों बीच घंटाघर पर बंद घड़ी हृदय को बंद करने के समान है। वास्तु के हिसाब से घर में भी बंद घड़ी अशुभ मानी जाती है। इसलिए लिए मुनि ने इसे अशुभ बताया था।

तत्कालीन महापौर ने लगवाई, एक साल चलीं फिर खराब हुई

मुनि प्रणाम सागर महाराज के कहने पर शहर का वास्तु सुधारने के लिए तत्कालीन महापौर ने 2013 में 19 मई को ट्रायल के लिए लगाई थी। इसके बाद 9 अक्टूबर 2014 को तीन घडिय़ां लगाई थी। घडिय़ों को रतलाम के घड़ी साज फैयाज अंसारी ने विशेष रूप से निगम के आर्डर पर बनाया था। सवा तीन फीट व्यास वाली इन घडिय़ों को 84000 रुपए की लागत से तब लगवाया था। सही ढंग से फिटिंग नहीं हो पाने के बारिश में दो घडिय़ां स्थान से हट गई थी। इन्हें निकालकर भंडार में रख दिया। वहीं दो घडिय़ां अभी भी घंटाघर पर बंद अवस्था में है। इनकी वाटरप्रूफ घडिय़ों की छह माह की वारंटी थी। उसके बाद रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया।

खबरें और भी हैं...