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बगैर मिट्‌टी के होगी सब्जी-फूलों की खेती भारत का इजरायल के साथ हुआ एमआेयू

3 वर्ष पहले
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मिट्‌टी में फल-सब्जी उगती है ये तो सभी ने देखा होगा लेकिन बगैर मिट्‌टी की फसल उगना आश्चर्यजनक है। खासियत यह है कि यदि आपके पास जमीन की कमी है यानी खेत नहीं है पर आप खेती-बाड़ी करना चाहते हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। खास बात यह है कि आंधी-तूफान आए, ओले पड़े, भारी बारिश हो या फिर भीषण गर्मी में भी मनचाही सब्जी या फिर फलों की खेती कर सकेंगे। ये सबकुछ संभव हुआ है हाइड्रोपाेनिक कल्टीवेशन से। यह तकनीक इजराइल, जापान, चीन, अमेरिका आदि देशों के बाद भारत में दस्तक दी है। इसकी सफलता को देखते हुए इंडोनेशिया, सिंगापुर, सऊदी अरब, कोरिया जैसे देशों में इस तकनीक की मांग तेजी से बढ़ी है। गौरतलब है कि जून-जुलाई 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने इजराइल दौरे के दौरान उन्होंने दांजिगेर फ्लॉवर फार्म जाकर उन्होंने फूलों की बगिया देखी और उसकी तकनीक भी जानी थी। बगैर मिट्‌टी की तकनीक को लेकर दोनों देशों ने एमओयू साइन कर दिए हैं।

इजराइल में हाइड्रोपोनिक्स एरोपोनिक्स तकनीक से बिना मिट्टी के अच्छी उपज ली जा रही है। इस फसल में मिट्टी के एक भी कण के बिना भी फूलों की खेती कर रहे हैं। वह भी रोग कीटाणु से पूरी तरह मुक्त और तंदुरूस्त होगी।

यह है तीन फायदे

ये हैं हाइड्रोपाेनिक तकनीक

ग्रीन सेड या पॉली हाउस में जमीन से 2-4 फीट की ऊंचाई पर स्टैंड लगाकर नारियल के खोल और ऊन के गुच्छों में पौधे रोपित किए जाते हैं। इसमें जमीन से दो से चार फीट की ऊंचाई पर स्टैंड बनाकर उनमें ट्रे या पाइपनुमा स्टैंड रखे जाते हैं, जिनमें कोको या पुरानी ऊन के गुच्छे भरकर उनमें पौधे लगाए जाते हैं। इन ट्रे या पाइप स्टैंड में पौधों की जड़े रहती है। इन पौधों को ऑटोमेटिक सिस्टम से जरूरत अनुसार पानी और ऑक्सीजन की सप्लाई मिलती है। एक किलोग्राम कोकोपिट 15 लीटर तक पानी संग्रहित कर सकता है।

10 लीटर पानी में तैयार हो जाएगी एक किलो सब्जी

जल और एग्री इनपुट्स की बर्बादी भी कम होती है। यह तकनीक पत्ते वाली सब्जियों के लिए ज्यादा उपयुक्त होती है। एक किलो सब्जी को खेत में उगाने पर 1800-3000 लीटर पानी की जरूरत होती है, लेकिन हाइड्रोपोनिक तकनीक से केवल 10-12 लीटर पानी से एक किलो सब्जी पैदा की जा सकती है।

हाइड्रोपोनिक तकनीक से सभी मौसम में कर सकेंगे खेती-बाड़ी निंदाई-गुड़ाई करने से किसानों को मिलेगी निजात नई तकनीक से 15 दिन पहले आ जाएगी फसल

...और इधर, बगैर मिट्‌टी के पैदा कर रहे हरा धनिया, 15 दिन पहले तैयार हो रही फसल

प्रदेश में रतलाम जिले के पिपलौदा तहसील के रियावन गांव के किसान अरविंद धाकड़ बिना मिट्टी के हरा धनिया लगाया है। यूनिट में 1000 पौधे लगाए हैं, प्रत्येक पौधे से 500-800 ग्राम पैदावार हो रहा है। इस तकनीक से एक महीने में फसल आ जाती है। तीन-चार बार कटाव भी कर रहे हैं। जबकि मिट्‌टी (पारंपरिक खेती) में फसल डेढ़ महीने में आती है। इसमें दो बार कटाव ही कर सकते हैं। किसान अरविंद धाकड़ मोबाइल नंबर 98263-50889 पर संपर्क जानकारी ले सकते हैं।

ऐसे देते हैं पोषक तत्व

पानी, कंकड़ों या बालू आदि में उगाए जाने वाले पौधों में इस घोल की महीने में एक-दो बार केवल कुछ बूंदें ही डाली जाती है। इस घोल में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, मैग्नीशियम, कैल्शियम, सल्फर, जिंक और आयरन आदि तत्वों को एक खास अनुपात में मिलाया जाता है। पानी का सर्कुलेशन किया जाता है। सिस्टम में पीवीसी पाइप में न्यूट्रिन को घूमाने के लिए 12 वॉल्ट के मोटर पंप का इस्तेमाल किया जाता है।

शुल्क जमा कर किसान भी ले सकते हैं पौधे

बिना मिट्‌टी के फूल और सब्जी के पौधे पर रिसर्च चल रहा है। कोई किसान पौधे लेना चाहता है तो उन्हें कान्हा सैया नर्सरी भोपाल कार्यालय में पहुंचकर प्रति पौधा सवा से डेढ़ रुपए देकर पौधा ले सकते है। संपर्क सूत्र : 0755-2570123

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