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मत्स्य विभाग ने सुक्ता जलाशय से मिटाए झींगा घोटाला के सबूत, जांच का था डर

3 वर्ष पहले
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जय जल देव कहार मछुआ समाज कल्याण समिति ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग

भास्कर संवाददाता | खंडवा

सुक्ता बांध में झींगा घोटाले की जांच में अफसरों ने फंसने के डर से सबूत मिटा दिए हैं। यह आरोप जय जल देव कहार मछुआ समिति ने लगाया है। समिति ने बताया कि मौके पर जाकर प्रमाण जुटाकर प्रशासन से शिकायत की थी। इसके बाद अफसरों ने मौके पर से सारे प्रमाण मिटाने का प्रयास किया है।

शिकायत के बाद मत्स्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारियों ने सुक्ता जलाशय से मछलियां पकड़ रहे मछुआरों को हटा दिया है। झींगों को रखने के लिए बनाए स्थान से दोनों फ्रिज एवं थर्माकोल के बक्से गायब कर दिए हैं। स्टोरेज सेंटर का महाराष्ट्र निवासी चौकीदार भी अब मौके पर मौजूद नहीं है। हालांकि अभी भी वहां प्रमाण मौजूद हैं जो अफसरों के भ्रष्टाचार की गवाही देते हैं।

मछुआ समाज के आठ सदस्यीय दल में छगन फुलमाली, दशरथ फुलमाली, सुभाष बावने, सुरेश बावने, गोपाल केशनिया, रमेश नागनपुरी, भूपेन्द्र फुलमाली एवं महेश बावनिया दोबारा मौके पर गए तो उस स्थान पर कोई नहीं मिला। मछुआरों का तंबू भी गायब था।

समिति ने बताया कि सुक्ता जलाशय पर झींगों का बड़ा घोटाला किया है। इसकी प्रमाणों के साथ शिकायत प्रशासन से की गई थी। शिकायतकर्ता महेश बावनिया ने बताया कि मुख्यमंत्री, मछली पालन मंत्री एवं जिला कलेक्टर को शिकायत करने के बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं की है। जयजलदेव कहार मछुआ समाज कल्याण समिति एवं राष्ट्रीय मच्छीमार संघ द्वारा शासन से उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है। बावनिया ने बताया कि संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष भाऊसाहब बावने एवं संगठन मंत्री अनिल कश्यप के निर्देशानुसार 14 अप्रैल को एक बार फिर से राष्ट्रीय मच्छीमार संघ एवं जय जलदेव कहार मछुआ समाज कल्याण समिति के 8 सदस्यीय दल ने सुक्ता जलाशय का निरीक्षण किया। दल ने यहां तैनात विभाग के शासकीय कर्मचारी विपला बर्डे एवं पन्नालाल डांगरे से बातचीत की। ये वही कर्मचारीगण है जिनकी देखरेख में यह जलाशय रहता है और यहां की सारी गतिविधियों को इनके द्वारा ही संचालित किया जाता है। इन्होंने ने यह तो माना की जलाशय में झींगा है किंतु झींगों के बारे में बात करने से मना कर दिया। जब उनसे झींगा पकडऩे वाले बाहरी शिकारी होने के बारे में सवाल किया गया तो कोई जानकारी न होने की बात कहकर टाल गए।

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