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देश का सबसे बड़ा बांध व प्रदेश को सबसे ज्यादा बिजली देने वाला थर्मल पावर होने के बावजूद हमारा जिला पिछड़ा

3 वर्ष पहले
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वह सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं

सेक्टरवार रैंकिंग और उसके कारण

कौशल विकास में 17वां स्थान, मिले 13.19 प्रतिशत अंक

कौशल विकास में 101 जिलों में पहले 20 में है। जिला 17वें स्थान पर है। यहां करीब 5 आईटीआई, दो पॉलीटेक्निक व इंजीनियरिंग कॉलेज हैं। इनसे युवा कौशल विकास केंद्र भी हैं। इनसे युवा प्रशिक्षण ले रहे हैं। इसके अलावा युवा इंदौर जाकर भी इंजीनियरिंग, सीए व चिकित्सा की पढ़ाई करके स्किल बढ़ा रहे हैं।

बुनियादी ढांचा 7वें नंबर पर, मिले सबसे ज्यादा 74.35 प्रतिशत अंक

बुनियादी ढांचा में जिला पहले 20 जिलों में है। यहां इंदिरासागर व ओंकारेश्वर बांध व सिंगाजी थर्मल पावर है। सड़कें अच्छी स्थिति में हैं। पर्यटन के लिए दो दो टापू हैं। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर है। स्कूल कॉलेजों की भी स्थिति है। मेडिकल कॉलेज भी इसी साल शुरू होने वाला है। 101 जिले में 7वीं रैंकिंग जिले को मिली है।

वित्तीय स्थिति अच्छी, 20वां स्थान, 48.20 अंक

फाइनेंशियल या वित्तीय समावेशन में जिला पहले 20 जिलों में है। 101 जिलों में 20वें स्थान पर है। जिले में बैंकिंग सेक्टर की स्थिति अच्छी है। जिले में करीब 119 बैंक शाखाएं हैं। निजी बैंक भी तेजी से जिले में अपना विस्तार कर रहे हैं। इनके अलावा अन्य वित्तीय संस्थाएं कार्यरत हैं।

शिक्षा में मिला 50वां स्थान, मिले 47.68 अंक

शिक्षा की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। स्कूल, कॉलेज, आईटीआई पॉलिटेक्निक होने के बावजूद गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा विद्यार्थियों को नहीं मिल रही है। विशेषकर प्राथमिक कक्षाओं में विद्यार्थियों की स्थिति कमजोर है। वे पांचवीं उत्तीर्ण कर लेते हैं पाठ पढ़ना नहीं आता। शिक्षक भी कमजोर हैं।

कृषि में खराब स्थिति 37वें स्थान पर, 14.14 अंक

कृषि प्रधान जिला होने के बावजूद इस सेक्टर में स्थिति खराब है। देश में 37वां स्थान मिला है। भरपूर पानी होने के बावजूद उसका उपयोग बेहतर ढंग से नहीं हो रहा है। मात्र 14.14 प्रतिशत अंक आए हैं। माइक्रो इरीगेशन की भी स्थिति अच्छी नहीं है।

नीति आयोग के मुताबिक खंडवा को नर्मदा नदी की नजदीकी का वरदान है। नर्मदा पर बने बड़े बांधों की वजह से देश में दूसरी जगहों में काफी खुशहाली है। लेकिन इन्हीं से विस्थापन भी हुआ है। इस वजह से यहां स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर शिक्षा तक के हालत बदतर है। औद्योगिकीकरण नहीं हुआ है।

स्वास्थ्य में हालात सबसे खराब, 91 स्थान पर जिला

1 अप्रैल से शुरू हो गई निगरानी

रैंकिंग जारी होने के बाद 1 अप्रैल से अब इन जिलों की निगरानी शुरू हो गई है। अगली रैंकिंग अब मई में आएगी। आयोग की टीमें भी सुधार कराने के लिए आने की संभावना है। प्रत्येक पिछड़े जिले की निगरानी के लिए एक आईएसएस को प्रभारी बनाया है। नीति आयोग देश के पिछड़े जिलों की रैंकिंग कुल 81 में से 49 संकेतकों (इंडीकेटर्स) के आधार पर करेगा। विकास के पांच मूलभूत तत्वों सेहत, पोषण, शिक्षा, कृषि तथा जल संसाधन, वित्तीय समावेश, कौशल विकास और मूल बुनियादी ढांचा क्षेत्र इसमें शामिल होंगे। आयोग के अनुसार प्रदर्शन के आधार पर इन जिलों के बीच आपसी प्रतिस्पर्धा होगी। जिलों की रैंकिंग के दौरान वास्तविक समय पर डाटा जमा करेगा। एक अप्रैल से एक ‘डैश बोर्ड’ भी शुरू कर दिया है। इस कार्यक्रम के तहत केंद्र एवं राज्यों की योजनाओं एवं कार्यक्रमों के बीच बेहतर तालमेल, केंद्र, राज्य स्तर के प्रभारी अधिकारियों तथा जिला कलेक्टरों के बीच गठजोड़ एवं जिलों के बीच प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम में प्रत्येक जिले को मजबूत बनाने, प्रगति को गति देने तथा उनकी रैंकिंग पर ध्यान दिया जाएगा।

जिले में डाक्टरों व स्टाफ नर्सों की कमी है। जिला अस्पताल सहित जिले के स्वास्थ्य केंद्रों, उप स्वास्थ्य केंद्रों पर डाक्टर नहीं हैं। जिला अस्पताल में क्लास वन के 38 पद स्वीकृत हैं। इनमें 23 पद खाली हैं। इसी प्रकार क्लास-टू के 26 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 7 पद खाली हैं।

इसलिए शुरू किया

नीति आयोग के मुताबिक ‘भारत के ये जिले जब तक आगे नहीं बढ़ते, देश उच्च दर से आर्थिक वृद्धि हासिल नहीं कर सकता। वृद्धि दर कितनी भी ऊंची क्यों न हो, उसका लाभ जब तक निचले स्तर तक नहीं जाता, उसका कोई मतलब नहीं है.’ आयोग ने इसके साथ ही इसी साल मई से जिलों में होने वाली प्रगति के आधार पर उनकी रैंकिंग (डेल्टा रैंकिंग) जारी करने की भी व्यवस्था की है। जिले एक-दूसरे के अनुभव से सीखेंगे।

प्रत्येक क्षेत्र में काम शुरू, सुधरेगी रैंकिंग

नीति आयोग के निर्देशों के मुताबिक प्रत्येक सेक्टर में काम शुरू हो गया है। शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा। स्वास्थ्य क्षेत्र में बेहतर काम शुरू हुआ है। आने वाले समय में प्रत्येक क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम आएंगे। रैंकिंग सुधरेगी। -अभिषेक सिंह, कलेक्टर

इस तरह मिलेंगे नंबर

30-30 फीसदी अंक शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए रखे गए हैं। यानी 60 फीसदी अंक इन दोनों क्षेत्रों में की जाने वाली तरक्की पर मिलेंगे। इन दो सेक्टर में कुल 21 सूचकांक हैं। कृषि व सिंचाई के 20, बुनियादी ढांचे और वित्तीय समावेशन के 10-10 फीसदी अंक हैं। इन पांच सेक्टर में कुल 49 सूचकांक बनाए गए हैं।

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