बरखेड़ा निवासी कल्याण सहाय का 27 वर्षीय पुत्र राकेश जांगिड भिवाड़ी में एक फैक्ट्री में काम करता था। साप्ताहिक अवकाश पर 2 मई को घर आया था। शाम को सब्जी लेने अलवर में घंटाघर के पास सब्जी मंडी पहुंचा और हादसे का शिकार हो गया। घटना के बारे में घटनास्थल से कुछ मीटर दूर सब्जी बेच रहे 72 वर्षीय रूपनारायण ने बताया कि तूफान से मंडी में भगदड़ सी मच गई थी। बिजली गुल होने के कारण अंधेरा छा रहा था। राकेश बचकर विशाल पीपल के पेड़ के नीचे खड़ा हो गया। बोला यहां कोई दिक्कत नहीं है बाबा। तभी जबरदस्त तेज हवा के झौके से भारी भरकम पीपल का पेड़ जड़ से उखड़ गया। उसके देखते-देखते राकेश पेड़ के नीचे दब गया। हमने निकालने की काफी कोशिश की, लेकिन वह करीब एक घंटे तक फंसा रहा। दरअसल पेड़ इतना वजनी था कि किसी का बस नहीं चला। काफी मशक्कत के बाद पेड़ के नीचे से निकाल उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
कहर: पूरा परिवार खत्म हो गया...
सीएम योगी भी अपने दौरे पर उससे मिले थे। मानवी नाना नानी के साथ घर लौट आई है। नाना वासुदेव कहते हैं कि 2 साल पहले मेरी बेटी की दहेज़ के कारण बलि इन लोगों ने चढ़ा दी थी, लेकिन हादसे की वजह से हमें उस परिवार की मदद को आगे आना पड़ा। हमारी नातिन मानवी वहां अकेली पड़ गई थी। उसे हम अकेला कैसे छोड़ते। अब वह हमारे साथ ही रहेगी। मानवी के दादा-दादी अभी तिरपाल में रह रहे हैं। पता नहीं कब तक उनका घर बनेगा। अभी मानवी के घाव भी नहीं भरे हैं। अब उसका हम स्कूल में एडमिशन कराएंंगे। मानवी के नाना बसाई खैरागढ़ में खेती-बाड़ी करते हैं। वह कहते हैं कि जैसे लगता है कि हमारी बेटी लौट आई है। अब मानवी की पढ़ाई से लेकर शादी तक का जिम्मा हमारा है। घायल मानवी को 50 हजार रुपए मिले हैं जो अभी उसके दादा के पास हैं। अगर वह देंगे तो उसकी पढ़ाई में काम आएंगे।
कहर: हवा ने उछाला, तीन साथी पिलर मेंे दब गए...
लेकिन इसे कुदरत का करिश्मा ही कहेंगे कि नीचे बैठे विक्षिप्त का कुछ नहीं बिगड़ा। उसके सिर से कुछ ऊंचाई पर पेड़ जमीन पर टिक गया। वह अब भी इसी पेड़ के नीचे बैठा रहता है। इस पेड़ को देखने वाले लोग कह रहे हैं कि यह कोई करिश्मा ही रहा होगा जो इस व्यक्ति के सिर के ठीक ऊपर गिरकर भी यह पेड़ उस तक नहीं पहुंच पाया।
करिश्मा: कार के ऊपर पलट गया टैंकर, लेकिन बच गई जान
आगरा के जौनई गांव के रहने वाले बलदेव और उनके बेटे सुदेश ने 2 मई को मौत को बहुत करीब से देखा है। बलदेव सिंह बताते हैं कि वो गांव से आगरा कैंट रेलवे स्टेशन के लिए निकले थे। गांव से डेढ़ से 2 किमी सड़क पर थे तभी तेज तूफान आ गया। उनकी गाड़ी धीमी हो गई। बगल से एक टैंकर जा रहा था। देखते ही देखते टैंकर उनकी कार पर पलट गया। एकदम से तो समझ ही नहीं आया क्या हो गया। अांखों के सामने अंधेरा छा गया। सुदेश चिल्लाने लगा लेकिन कोई हमारी सुनने वाला नहीं था। दबाव की वजह से कार के शीशे टूट गए थे। किसी तरह सामने की तरफ से हम बाहर निकले। काफी देर तक हम सड़क के किनारे दुबके रहे। हम लोगों को काफी चोट आ गई थी। सुदेश का पैर टूट गया था और मेरे सिर पर चोट लगी थी। जब तूफान शांत हुआ तो चोट भूलकर हम गांव में लौटे। जहां हाहाकार मचा हुआ था। मेरे घर का एक हिस्सा भी ढह गया था। फ़िलहाल हमें चार दिन पहले अस्पताल से छुट्टी मिली है। मुआवजा जो मिला उससे घर का काम शुरू करवाया है। लेकिन पूरी गाड़ी ध्वस्त हो गई। अभी वह कंपनी वाले ले गए हैं।
बंगले का सौदा...
विवाद को आपसी सहमति से निपटाया जाएगा। दरअसल, कुछ साल पहले भी इस तरह की चर्चा चली थी, लेकिन इस बार सौदा पक्का है। अभय जैन ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि खंडवा के पुश्तैनी बंगले और दुकानों को लेकर गांगुली परिवार में विवाद था। उनके परिवार के सदस्यों में सामंजस्य बैठाकर मामले को सुलझा रहे हैं। बंगले की डील फाइनल हो गई है। सारे मामले सुलझाने के बाद ही बंगले की रजिस्ट्री होगी। उन्होंने कहा किशोर कुमार के खंडवा स्थित बंगले के स्थान पर कॉम्पलेक्स बनाया जाएगा। किशोर कुमार की स्मृतियों को भी सहेजेंगे।
बंगले का मालिक मैं...
क्योंकि मैं ही इसका मालिक हूं। उन्होंने कहा जब प्रॉपर्टी की व्हील कराई गई थी, तब उसमें सबसे ज्यादा मेरा शेयर था। शेष हिस्सा अमित कुमार (किशोर कुमार के बेटे) का था। उस वक्त सुमित का जन्म भी नहीं हुआ था। कुछ सालों बाद अमित भैया ने प्रॉपर्टी में उनका हिस्सा भी मेरे नाम कर दिया। इसके दस्तावेज भी मेरे पास है। अचानक सुमित कुमार प्रॉपर्टी में हिस्सा लेने आ गया। रही बात बंगले की खरीदी की तो जिस अभय जैन का नाम सामने आ रहा है, उन्होंने किससे सौदा किया, मुझे नहीं पता। यदि मुझसे मिले हैं तो सबूत पेश करें। किसी ने द्वेषपूर्वक और मुझे परेशान करने के लिए अफवाह फैलाई है। प्रॉपर्टी में फिलहाल मुझे छोड़कर किसी का भी नाम नहीं है।
यदि सरकार वाजिब कीमत दे तो मैं बंगला बेचने को तैयार हूं
किशोर कुमार के जर्जर बंगले को स्मारक के तौर पर संजोए रखने को लेकर कई बार विचार हुए, लेकिन हुआ कुछ नहीं। इस पर अर्जुन कुमार का कहना है कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा इसे खरीदने को लेकर सिर्फ बातें ही हुई। यदि सरकार वाजिब कीमत देने को तैयार हैं तो मैं भी बंगला सरकार को बेचने के लिए तैयार हूं।