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किशोर कुमार की यादों का सौदा

3 वर्ष पहले
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खंडवा | बांबे बाजार स्थित 7200 स्क्वेयर फीट में फैले किशोर कुमार के पुश्तैनी बंगले का सौदा हो गया है। हालांकि इसकी रजिस्ट्री होना अभी बाकी है। वहीं शहर सहित देशभर में फैले किशोर प्रेमियो में बंगले का सौदा चर्चा का विषय बन गया है। इस बंगले का शहर के कॉलोनाइजर अभय जैन ने सौदा किया है। वे यहां कॉम्प्लेक्स बनाएंगे और किशोर की स्मृतियां भी संजाेएंंगे। वहीं किशोर प्रेमियों का कहना है बंगला हमारे लिए मंिदर से कम नहीं है। हम इसे किसी भी कीमत पर बिकने नहीं देंगे। भले ही इसके लिए प्रदर्शन ही क्यों न करना पड़े।

किशोर के नाम से दें शहर को सौगात

किशोर दा का बंगला शहर की विरासत थी। किशोर दा ने खंडवा का नाम दुनिया में रोशन किया। शासन परिवार की सहमति से विरासत को स्मारक बना सकता था। अब बंगला बिक चुका है। लेने वाले वहां भले ही मार्केट बनाए, लेकिन किशोर कुमार के नाम से सौगात दें। मार्केट बनने से व्यापार भी बढ़ेगा। संतोष गुप्ता, अध्यक्ष वस्त्र विक्रेता संघ

बन सकता है सांस्कृतिक और व्यावसायिक हब

किशोर दा का बंगला व्यक्तिगत संपत्ति है। खरीददार पर निर्भर करता है, वह क्या करे। सांस्कृतिक और व्यावसायिक हब बन सकता है। व्यावसायिक दृष्टि के साथ किशोर दा की स्मृति को भी संजोता है तो अच्छी बात है। मौके पर किशोर दा के नाम पर मॉल बन सकता है, साथ ही मल्टीप्लेक्स भी बन सकता है। -सुनील बंसल, सचिव चेंबर ऑफ कामर्स

शासन रजिस्ट्री से पहले करे अधिग्रहण

ऑनरशिप प्रापर्टी है, तो शासन अपने स्तर पर अधिग्रहण कर पेमेंट दें। परिजन से त्याग की अपेक्षा करे यह ठीक नहीं। किशोर दा का खंडवा से जुड़ाव था। उनके नाम पर सरकार पुरस्कार देती है। अनेक कार्यक्रम करती है, जो भी प्रापर्टी है किशोर दा के नाम सरकार को कर देना चाहिए। रजिस्ट्री के पहले कीमत तय हो गई है। अधिग्रहण तो बिक्री होने के बाद भी किया जा सकता है। -सुभाष नागोरी, अधिवक्ता



किशोर दा हरफनमौला एक्टर और गायक थे। बांबे बाजार स्थित पैतृक घर का पिछला हिस्सा जर्जर होकर टूट चुका है। छज्जा भी गिर गया है। मकान में चौकीदार सीताराम सावनेर देखरेख करता है। किशोर कुमार का जन्म 4 अगस्त, 1929 को खंडवा में हुआ। निधन 13 अक्टूबर, 1987 को। वसीयत में लिखी अंतिम इच्छा के मुताबिक अर्थी इसी मकान से निकली थी। अंतिम संस्कार खंडवा में ही किया गया। वहीं पर सरकार ने किशोर कुमार स्मारक बनाया है।

जर्जर मकान तोड़ने के लिए 3 बार निगम दे चुका नोटिस

निगम के रिकार्ड में मकान कल्याण कुमार कुंजीलाल गांगुली (अमीत कुमार पिता स्व.किशोर कुमार व अन्य) के नाम से दर्ज है। भवन करीब 100 साल पुराना है। जर्जर होने के कारण इसका एक हिस्सा टूट चुका है। जनहानि नहीं हो इसलिए भवन तोड़ने के लिए निगम तीन साल में तीन बार नोटिस दे चुका है। 12 जुलाई 2017 को 24 घंटे में तोड़ने का नोटिस चस्पा किया था।

हमें बताएं किशोर दा के बंगले के सौदे को लेकर देशभर के किशोर प्रेमियों में नाराजगी है। इस मुद्दे पर हमें बताएं आपकी राय। हमारा माेबाइल नं. 9713679884

खंडवा की पहचान पं. माखनलाल चतुर्वेदी का कर्मवीर प्रेस भवन पहले ही बिक चुका है, वहां बिल्डिंग खड़ी है और अब गांगुली हाउस का भी सौदा हो गया....

4 साल पहले अनूप के बेटे ने कहा था नहीं बेचेंगे घर

किशोर कुमार के बेटे सुमित और भाई अनूप कुमार के बेटे अर्जुन ने 4 साल पहले खंडवा में कहा था यह बाबा की आस्था और प्रेम का मंदिर है, हम नहीं बेचेंगे। बाबा का घर देखकर दिल को सुकून मिला। किशोर कुमार के छोटे बेटे सुमित गांगुली दो वर्ष पूर्व अपने पैतृक घर पहुंचे थे। वे यहां एक घंटे तक रुके थे।

बिकने नहीं देंगे, किशोर दा का मंदिर, करेंगे आंदोलन

मकान बिकने पर किशोर सांस्कृतिक प्रेरणा मंच ने आक्रोश जाहिर किया। मंच के प्रदीप जैन ने कहा कि हम किशोर दा के मंदिर को बिकने नहीं देंगे, चाहे इसके लिए आंदोलन करना पड़े। गुवाहाटी के स्वरूपदास, नासिक जिला आर्केस्ट्रा एसोसिएशन के संचालक उमेश गायकवाड़, शाजापुर के किशोर ने भी किशोर दा के मकान का सौदा होने पर विरोध किया।

यह तस्वीर बंगले के अंदर की है। किशोर कुमार की तस्वीर भी तब कि जब वे खंडवा आए थे।

हम चंदा कर जुटाएंगे रुपए पर नहीं बिकने देंगे बंगला

लखनऊ स्थित किशोर कुमार मेमोरियल कल्चर एसोसिएशन ने भी किशोर दा का बंगला बिकने का पुरजोर विरोध किया है। एसोसिएशन के देबा किशोर ने कहा हम जून में खंडवा आएंगे और किशोर दा के बंगले के सामने ही विरोध प्रदर्शन करेंगे। किसी भी सूरत में बंगला बिकने नहीं देंगे। देशभर में चंदा मांगेंगे और रुपए जुटाकर बंगला खरीदने वाले को देंगे।

मुंबई छोड़कर इसी घर में आना चाहते थे किशोर दा

किशोर सांस्कृतिक प्रेरणा मंच के प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया किशोर दा के सपनों का महल गौरीकुंज है। यहीं उनका जन्म हुआ था। किशोर कुमार मुंबई छोड़कर इसी घर में आना चाहते थे। गौरीकुंज किशोर प्रेमियों के लिए संगीत का मंदिर है।

14 साल पहले बिक चुका है कर्मवीर भवन

आजादी की लड़ाई में कलम से देशभक्ति का जज्बा जगाने वाले पद्मभूषण पंडित माखनलाल चतुर्वेदी का कर्मवीर प्रेस भवन करीब 14 साल पहले बिक चुका है। 4 अप्रैल 1925 को उन्होंने खंडवा से कर्मवीर का प्रकाशन किया था। प्रेस भवन के पास वे जिस मकान में रहते थे वह भी बिक चुका है। दोनों ही स्थान पर आज शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बन गए हैं।

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