किसान अपना मुनाफा बढ़ाने के मकसद से गेहूं और धान के फसली चक्कर से निकलकर सब्जियों की खेती को बढ़ावा दे रहे हैं। लेकिन खेती बढ़ने के साथ साथ मुनाफा होना तो दूर उल्टा सब्जियों के दाम गिर रहे हैं। जिसके चलते फिर किसान को घाटा पड़ रहा है। इन दिनों टमाटर की लोकल पैदावर ज्यादा होने कारण इसके रेट इतने गिर गए हैं कि मंडियों में 50 रुपए का क्रेट (25 किलो) भी बिक रहा है।
कुल मिलाकर किसानों ने अब टमाटरों की खेती से भी तौबा करनी शुरू कर दी है। गेहूं और धान की खेती में किसानों को उचित दाम नहीं मिले तो अन्नदाता ने सब्जियों की खेती तेज कर दी। लेकिन पहले आलुओं की ऐसी हालत हुई कि किसान सड़कों पर फेंकने को मजबूर हुए। अब टमाटर ने भी किसानों के साथ साथ आढ़तियों तथा सब्जी विक्रेताओं का बुरा हाल कर दिया है।
50 रुपए में बिक रहा है 25 किलो का क्रेट
खन्ना सब्जी मंडी में पटियाला से आ रहे टमाटर का रेट कम से कम 50 रुपए प्रति क्रेट (25 किलो) और ज्यादा से ज्यादा 100 रुपए प्रति क्रेट मिल रहा है। इस हिसाब से टमाटर 2 से 4 रुपए प्रति किलो मिल रहे हैं। रेहडिय़ों पर 7 से 10 रुपए प्रति किलो टमाटर मिल रहे हैं। आढ़तियों ने कहा कि पहले टमाटर का रेट कम से कम 35 रुपए प्रति किलो था। इस बार टमाटर की खेती ज्यादा होने कारण रेट गिरा है। किसान फ्री के दाम टमाटर बेचने को मजबूर हैं। क्योंकि,गर्मी का सीजन होने कारण इन्हें ज्यादा देर रखा नहीं जा सकता।
सरकार की गलत नीतियां जिम्मेदार: किसान
किसान कुलविंदर सिंह, सुरजीत सिंह व गुरदीप सिंह ने कहा कि खेती काे घाटे का धंधा बनाने के पीछे सरकारों की गलत नीतियां जिम्मेवार हैं। किसान को राहत तो क्या मिलनी थी, उल्टा ज्यादा पैदावार ने टमाटरों का मुनाफा भी खा लिया है। सरकार को गंभीरता से उचित हल निकालने की जरूरत है। देश का अन्नदाता खुशहाल होगा, तो ही सभी वर्गों का विकास संभव होगा।