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अचानक गिरे टमाटर के दाम, 35 रुपए किलो बिकने वाला टमाटर 4 रुपए किलो पहुंचा
टमाटरों की ज्यादा पैदावार से रेट गिरे, आढ़ती, किसान और सब्जी विक्रेता परेशान
एग्रीकल्चर रिपोर्टर | खन्ना
किसान अपना मुनाफा बढ़ाने के मकसद से गेहूं और धान के फसली चक्कर से निकलकर सब्जियों की खेती को बढ़ावा दे रहे हैं। लेकिन खेती बढ़ने के साथ साथ मुनाफा होना तो दूर उल्टा सब्जियों के दाम गिर रहे हैं। जिसके चलते फिर किसान को घाटा पड़ रहा है। इन दिनों टमाटर की पैदावर ज्यादा होने कारण इसके रेट इतने गिर गए हैं कि मंडियों में 50 रुपए का क्रेट (25 किलो) भी बिक रहा है। कुल मिलाकर किसानों ने अब टमाटरों की खेती से भी तौबा करनी शुरू कर दी है। गेहूं और धान की खेती में किसानों को उचित दाम नहीं मिले तो अन्नदाता ने सब्जियों की खेती तेज कर दी। लेकिन पहले आलुओं की ऐसी हालत हुई कि किसान सड़कों पर फेंकने को मजबूर हुए। अब टमाटर ने भी किसानों के साथ साथ आढ़तियों तथा सब्जी विक्रेताओं का बुरा हाल कर दिया है।
खन्ना सब्जी मंडी में पटियाला से आ रहे टमाटर का रेट कम से कम 50 रुपए प्रति क्रेट (25 किलो) और ज्यादा से ज्यादा 100 रुपए प्रति क्रेट मिल रहा है। इस हिसाब से टमाटर 2 से 4 रुपए प्रति किलो मिल रहे हैं। रेहडिय़ों पर 7 से 10 रुपए प्रति किलो टमाटर मिल रहे हैं। सब्जी मंडी के आढ़तियों हरविंदर शंटू, सुधीर सोनू, हरमन शेरगिल व पवन कुमार ने कहा कि पहले टमाटर का रेट कम से कम 35 रुपए प्रति किलो था। इस बार टमाटर की खेती ज्यादा होने कारण टमाटर इतनी ज्यादा मात्रा में मंडियों में आ चुका है कि खुद आढ़ती भी हैरान हैं कि इस बार क्या हो रहा है। किसान फ्री के दाम टमाटर बेचने को मजबूर हैं। क्योंकि,गर्मी का सीजन होने कारण इन्हें ज्यादा देर रखा भी नहीं जा सकता। टमाटरों के रेट गिरने से न तो आढ़तियों को कुछ बच रहा है, न ही किसानों व रेहड़ी वालों को।
वहीं किसानों कुलविंदर सिंह बग्गा, सुरजीत सिंह व गुरदीप सिंह ने कहा कि खेती का धंधा घाटे का बनकर रह गया है। इसके पीछे सरकारों की गलत नीतियां जिम्मेवार हैं। पहले से कर्ज की मार झेल रहे किसान को राहत क्या मिलनी थी, उल्टा ज्यादा पैदावार ने टमाटरों का मुनाफा भी खा लिया है। सरकार को गंभीरता से उचित हल निकालने की जरूरत है। क्योंकि, अगर देश का अन्नदाता खुशहाल होगा, तो सभी वर्गों का विकास संभव होगा। सब्जी मंडी में रेहड़ी लगाने वाले राजू, पवनदीप और काकू ने कहा कि किसी समय में 500 रुपए में क्रेट मिलता था, अब 500 रुपए में पूरी रेहड़ी भर जाती है। लेकिन कम रेट से मुनाफा भी कम हो रहा है।