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‘घोड़े रूपी मन को ज्ञान रूपी रस्सी से बांधकर रखो’

3 वर्ष पहले
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शहर के शिवपुरी मोहल्ला स्थित जैन स्थानक में मंगलवार को सत्संग के दौरान माया रूपी संसार में फैले मन को काबू करने के तरीके बताए गए। मधुर वक्ता श्री चेलना जी महाराज ने कहा कि यह मन घोड़ा है। इस घोड़े रूपी मन को श्रुत ज्ञान रूपी रस्सी से बांधकर रखना है यह मनुष्य जन्म हमें बार बार मिलने वाला नहीं है। यदि हमारे कर्म भाव अच्छे होंगे तभी हमारी गति भी अच्छी होगी। हमारा मन हमेशा ही भटकता रहता है। मन को एकाग्र करना बेहद जरूरी है। मन को एकाग्र करने का एक ही तरीका है कि ज्यादा से ज्यादा समय प्रभु का सिमरन करें। फिर प्रभु खुद आपकी इच्छा भावना को देखते हुए इतना योग्य बनाएंगे कि मन को काबू किया जा सके। जो अपने मन को वश में कर लेता है, वह लोक तथा परलोक में सुखी रहता है। इस मौके पर एसएस जैन सभा के विपन जैन, रमेश जैन, राकेश जैन, धनेंद्र जैन, रमणीक जैन, सुशील जैन भी मौजूद रहे।

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