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गांव रसूलड़ा के मॉडल स्कूल की बिल्डिंग अनसेफ, शेडों के नीचे पढ़ने को मजबूर बच्चे

3 वर्ष पहले
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पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड की तरफ से खन्ना ब्लाक में ललहेड़ी और रसूलड़ा के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूलों को अप्रैल में माॅडल स्कूल घोषित कर दिया गया। लेकिन रसूलड़ा के स्मार्ट स्कूल की हालत बदतर है। स्कूल में 6वीं से लेकर 12वीं तक 13 सेक्शन में 496 स्टूडेंट्स हैं। इनके लिए मात्र 6 कमरे बने हैं। जिस कारण दो क्लासें शेडों के नीचे लगाई जाती हैं। वहां पर धूप और बारिश से बचाव के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। वहीं, पीडबल्यूडी द्वारा घोषित की गई स्कूल की अनसेफ बिल्डिंग किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती है। स्कूल की अनसेफ बिल्डिंग को गिराने और नए कमरे बनाने के लिए स्कूल प्रबंधन की तरफ से कई बार डीईओ और एसडीएम खन्ना को लेटर भेजे गए। लेकिन आज तक स्कूल को एक पैसे की सरकारी मदद तो दूर किसी उच्च अधिकारी ने आकर जायजा तक नहीं लिया। स्कूल की इस बदतर हालत का प्रभाव नतीजों पर पड़ना लाजिमी है, क्योंकि, जब बच्चों के पढ़ाई का उचित माहौल ही नहीं मिल रहा है तो टीचर कहां से बेहतर रिजल्ट ला सकते हैं।

यह है स्कूल का हाल

अप्रैल में पीडब्ल्यूडी ने स्कूल के 8 कमरों को अनसेफ घोषित करते हुए इन्हें बंद करने के आदेश जारी किए थे। स्कूल प्रबंधन ने कमरों को बंद कर दिया। लेकिन कमरे कम होने कारण बच्चों को बैठने तक को जगह नहीं थी। भीषण गर्मी में बच्चे पेड़ों के नीचे बैठकर पढ़ाई करते थे। गांव की पंचायत ने गणमान्य लोगों से मिलकर रुपए इकट्ठे करके स्कूल में दो शैडों का निर्माण कराया और वहां पंखे लगाकर क्लासें शुरू कराईं। अब इन शैडों के नीचे 7वीं और 12वीं क्लासों की पढ़ाई होती है।

फीस लेते हैं मगर कभी कंप्यूटर तक नहीं दिखाए

नहीं मिली ग्रांट

पीडब्लयूडी ने स्कूल के 8 कमरों को अनसेफ घोषित किया था। अब स्कूल में 13 सेक्शनों के लिए 6 कमरे बचे। इसे लेकर संबंधित अधिकारियों को लिखित में दिया गया। लेकिन ग्रांट नहीं आई। पंचायत ने शैडों का निर्माण कराया। जिससे काम चल रहा है। भूपिंदर कौर, प्रिंसिपल

स्कूल में बच्चों तथा उनके अभिभावकों में इस बात को लेकर रोष है कि हर महीने कंप्यूटर फीस ली जाती है। लेकिन अनसेफ कमरों में जो कमरा कंप्यूटर लैब का था, वो बंद होने कारण कभी भी कंप्यूटर बच्चों को सिखाना तो दूर, दिखाए तक नहीं जाते। या तो बच्चों की क्लास लगाई जाए या फिर फीस लेना बंद किया जाए।

शेडों का कराया निर्माण

स्कूल में बच्चों के बैठने को जगह कम है। अनसेफ कमरों को गिराया नहीं जा रहा है। पंचायत ने गांव में कलेक्शन करके दो शैडों का निर्माण कराया है। माडल स्कूलों में से ललहेड़ी को ग्रांट भेज दी गई। जबकि रसूलड़ा स्कूल को एक पैसा नहीं आया। साधू सिंह, स्कूल कमेटी चेयरमैन

हल करेंगे समस्या

माॅडल स्कूलों के लिए अभी फंड नहीं आए हैं। फंड आने पर स्कूल वाले खर्च करके समस्याएं हल कर सकते हैं। बाकी रसूलड़ा स्कूल की जो समस्या है, उसे मैं खुद भी विजिट करके देखूंगी और इसका हल किया जाएगा। स्वर्णजीत कौर, डीईओ लुधियाना

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