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वैज्ञानिकों ने गलती से बनाया प्लास्टिक खाने वाला एंजाइम; हजारों साल में खत्म होने वाले प्लास्टिक को कुछ दिन में खाकर खत्म करेगा
ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा एंजाइम विकसित किया है, जो प्लास्टिक को खाकर खत्म कर देगा। खास बात ये है कि इस एंजाइम को वैज्ञानिकों ने लैब में काम करते हुए गलती से ढूंढ निकाला। ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी ऑफ पोर्ट्समाउथ के रिसर्चर असल में कॉलेज लैब में बैक्टीरिया से जुड़े अध्ययन कर रहे थे। प्रयोगों में कुछ ऐसी गफलत हुई कि नया एंजाइम तैयार हो गया। वैज्ञानिकों ने इस नए किस्म के एंजाइम पर ध्यान दिया तो अनोखा गुण पता चला। जो प्लास्टिक समुद्रों में या मिट्टी में घुलकर खत्म होने में सैकड़ों साल लगा देता है, उस प्लास्टिक को ये ‘प्लास्टिक ईटिंग एंजाइम’ कुछ दिनों में ही खाकर खत्म कर देता है। गलती से मिले इस एंजाइम को लेकर वैज्ञानिक उत्साहित हैं और इसको विकसित करने पर काम शुरू भी कर दिया है। प्रक्रिया सफल रही तो दुनिया भर में प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण पर लगाम लगाई जा सकती है। यूनिवर्सिटी ऑफ पोर्ट्समाउथ के प्रोफेसर जॉन मैक्गीहम ने बताया कि- ‘हमने जो एंजाइम बनाया है वो पॉलीएथीलीन ट्रेफ्थालेट (पीईटी) प्रकार के प्लास्टिक को खाकर खत्म करने में सक्षम है। इस तरह की प्लास्टिक दुनिया में सबसे ज्यादा पाई जाती है, क्योंकि प्लास्टिक बोतलों में इसका ही इस्तेमाल होता है। पीईटी के बारे में सबसे खराब बात ये है कि इसे नष्ट होने में भी सबसे ज्यादा समय लगता है।’ प्रोफेसर जॉन की टीम का दावा है कि जब इस एंजाइम को एमीनो एसिड देते हैं तो ये दोगुनी तेजी से प्लास्टिक खाने लगता है।
दुनिया भर में प्लास्टिक पॉल्यूशन की समस्या कितनी बड़ी है इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि हर साल समुद्रों में 80 लाख टन प्लास्टिक घुल रहा है। हर साल 10 लाख से ज्यादा जलीय जीवों की मौत सिर्फ समुद्रों में घुले प्लास्टिक से होने वाले इंफेक्शन की वजह से हो जाती है। दुनिया भर में जितना प्लास्टिक इस्तेमाल होता है, उसका सिर्फ 9% प्लास्टिक ही रिसाइकिल हो पाता है।
एंजाइम को विकसित किया जा रहा है, सफल रहा तो प्लास्टिक से होने वाला प्रदूषण खत्म हो सकेगा
वैज्ञानिकों ने 2016 में कचरे के ढेर से प्लास्टिक रिसाइकिल करने वाला बैक्टीरिया खोजा था, उसी पर शोध करते हुए अब ये एंजाइम खोजा
इससे पहले 2016 में भी वैज्ञानिकों को एक ऐसे ही बैक्टीरिया के बारे में पता चला था, जो प्लास्टिक के रिसाइकलिंग में मददगार साबित होता है। हालांकि ये बैक्टीरिया लैब में तैयार किया हुआ नहीं था, बल्कि इसे वैज्ञानिकों ने जापान के एक वेस्ट रिसाइकलिंग सेंटर में कचरे के ढेर में से खोजा था। वैज्ञानिकों को ये बैक्टीरिया तो मिल गया था, लेकिन तमाम शोध के बाद भी इसकी संरचना के बारे में कुछ पता नहीं चल रहा था। अभी भी पोर्ट्समाउथ यूनिवर्सिटी की टीम लैब में इसी बैक्टीरिया से जुड़े विषयों पर अध्ययन कर रही थी। इसी अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों से उनके प्रयोग में एक गलती हो गई और इसी गलती से नए प्लास्टिक ईटिंग एंजाइम का फॉर्मूला मिल गया।