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भारत में हर साल करीब 2.39 लाख बेटियों की मौत, वजह- लैंगिक भेदभाव से होने वाली लापरवाही: रिपोर्ट

3 वर्ष पहले
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इन 2.39 लाख मौतों में भ्रूण हत्याएं तो शामिल ही नहीं हैं लैनसेट ने 640 जिलों में अध्ययन किया

एजेंसी | लंदन

देश में हर साल 2.39 लाख बेटियों की मौत सिर्फ इस वजह से हो रही है, क्योंकि उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर दिया जाता है। इसके पीछे वजह होता है- लैंगिक भेदभाव। पिछले एक दशक में इस वजह से 24 लाख बेटियों की मौत हो चुकी है। खास बात तो ये है कि इन 2.39 लाख मौतों में भ्रूण हत्याओं की संख्या तो शामिल ही नहीं है। ये नतीजे मेडिकल जर्नल लैनसेट के अध्ययन से सामने आए हैं। लैनसेट ने भारत के 640 जिलों का सैंपल लेकर ये अध्ययन किया है। लैनसेट के रिसर्चर क्रिस्टोफ गुइलमोटो कहते हैं- \\\"अमूमन हम समझते हैं कि लैंगिक भेदभाव की वजह से लड़कियों को जन्म लेने में ही समस्या आती है, लेकिन असल में उनके जन्म लेने के बाद भी समस्या जारी रहती है।\\\'

खास बात ये है कि इस रिपोर्ट में जिन 2.39 लाख लड़कियों की मौतों का जिक्र किया गया है, ये वो केस हैं, जिन्हें जागरुकता से रोका जा सकता था। इन्हें रिपोर्ट में ‘अवॉइडेबल डेथ’ कहा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक- भारत के 80% से ज्यादा राज्यों में 5 साल से कम उम्र की बच्चियों की मृत्युदर में पिछले एक साल में इजाफा हुआ है। 2000 से 2005 के बीच 1000 बेटियों में 18.5 की जन्म के समय ही मौत हुई। जितनी लड़कियों की लैंगिक भेदभाव की वजह से मौत होती है, उनमें से दो-तिहाई तो 4 राज्यों से ही रहती हैं- उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्यप्रदेश।

लैनसेट की स्टडी के नतीजे, लैंगिक भेदभाव के चलते बेटियों की समस्याएं नजरअंदाज होती हैं

भारत में 107-100 का लिंग-अनुपात

रिपोर्ट के मुताबिक- भारत में 107 लड़कों पर 100 लड़कियों का लिंग अनुपात है। यानी 107 लड़कों पर 100 लड़कियों का जन्म होता है। देश में लड़कियों की संख्या लड़कों से करीब 6 करोड़ कम है।

640 जिलों का सैंपल लेकर अध्ययन किया गया। एक दशक में करीब 24 लाख बेटियों की मौत।

बेटी मृत्युदर में 4 राज्यों की स्थिति सबसे खराब- उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्यप्रदेश।

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