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नहीं रखा कमर्शियल प्राॅपर्टी नक्शा फीस कम करने का प्रस्ताव, जूनियर वाइस प्रेसीडेंट ने जताई नाराजगी

कमर्शियल प्राॅपर्टी नक्शा फीस में कटौती की मांग को लेकर 10 मई को भूख हड़ताल पर बैठ चुके नगर काउंसिल के जूनियर वाइस...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 31, 2018, 02:05 AM IST

कमर्शियल प्राॅपर्टी नक्शा फीस में कटौती की मांग को लेकर 10 मई को भूख हड़ताल पर बैठ चुके नगर काउंसिल के जूनियर वाइस प्रेसीडेंट कमल किशोर शर्मा के लिए उक्त संघर्ष अब गले की फांस बनता नजर आ रहा है। कमल किशोर शर्मा ने अपनी भूख हड़ताल काउंसिल के एक जेई के यह कहने पर एक दिन बाद ही समाप्त कर दी थी कि नगर काउंसिल की आगामी मीटिंग में फीस कटौती का प्रस्ताव लाया जाएगा। लेकिन 20 दिन बाद 31 मई को होनी वाली नगर काउंसिल की मीटिंग के संबंध में जारी हुए एजेंडा में उक्त प्रस्ताव का कोई जिक्र ही नहीं है।

मीटिंग के संबंध में सभी पार्षदों को पहले ही जारी हुई एजेंडा की प्रति के बाद कमल किशोर ने खरड़ से संबंधित विभिन्न सोशल मीडिया वॉट्स एप ग्रुपों में प्रतिक्रिया रखते हुए एक लेटर पोस्ट करके, बगावत के सुर दिखाते हुए चेतावनी दी है कि जब तक काउंसिल की मीटिंग में नक्शा फीस कटौती का प्रस्ताव नहीं लाया जाता तब तक वह काउंसिल की मीटिंग नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि वह इस बात से हैरान हैं कि उन्हें भूख हड़ताल से उठाते समय काउंसिल के अधिकारी ने सिर्फ दो दिन में ही काउंसिल की मीटिंग बुलाकर कमर्शियल नक्शा फीस कटौती संबंधी प्रस्ताव रखे जाने का आश्वासन दिया था।

लेकिन दो दिन के बाजय 20 दिन बीत जाने के बाद काउंसिल की मीटिंग अनाउंस तो हुई लेकिन एजेंडा में उक्त प्रस्ताव नहीं रखा गया। उन्होंने कहा कि काउंसिल प्रधान की ओर से उक्त मीटिंग के एजेंडा में फीस कटौती का प्रस्ताव ना लाना, पता नहीं उनकी मंशा को दर्शाता है। अब देखना यह होगा कि कमल किशोर किस प्रकार अपना शक्ति प्रदर्शन दिखा कर आज होने वाली काउंसिल की मीटिंग को रोक पाते हैं।

काउंसिल प्रधान ने ईओ से मांगा जवाब, कहा- अब सीधे तौर पर क्यों नहीं कटौती की जा सकती फीसों में : काउंसिल प्रधान अंजू चंदर ने कहा कि वर्ष 2016 में सरकार की नोटिफिकेशन जारी होने के बाद जुलाई, 2017 में विभाग की ओर से खरड़ में कमर्शियल प्राॅपर्टी नक्शा फीस में बढ़ौतरी की गई थी। तब लोगों ने विरोध भी किया था, तब मामला हाउस मीटिंग में आया था। तब भी हाउस ने अधिकारियों से पूछा था कि इन बढ़ी हुई फीस को लागू करने से पहले हाउस से मंजूरी क्यों नहीं ली गई। तब काउंसिल के ईओ व एमई ने जवाब दिया था कि सरकारी नोटिफिकेशन के बाद हाउस की प्रवानगी की जरूरत ही नहीं होती। उस समय हाउस की मीटिंग में कमल किशोर भी मौजूद थे। अब जब फीस कम करने संबंधी सरकार ने 6 अक्टूबर 2017 को लेटर जारी किया तो पहले अधिकारियों ने उक्त लेटर को हाउस से छिपाए रखा। अब जब उक्त पत्र के बारे में सबको पता चला है तो अफसर इस पत्र के आधार पर फीसों में कटौती के लिए लेटर को हाउस में लाने की बात कर रहेे हैं।

काउंसिल प्रधान ने मांगा जवाब: काउंसिल प्रधान ने अधिकारियों से जवाब मांगा है िक अगर सरकारी नोटिफिकेशन सीधे तौर पर लागू हो सकती है तो फीस कटौती के लिए हाउस से मंजूरी क्यों मांगी जा रही है। इसे भी सीधे तौर पर लागू किया जा सकता है। इस लेटर की एक-एक कॉपी काउंसिल के सीनियर उप प्रधान और जूनियर उप प्रधान को भी भेजी गई है।

जुलाई, 2017 में बढ़ी थी कमर्शियल नक्शा फीस

जुलाई 2017 में सरकार की ओर से पहले कोई सूचना दिए बगैर और नगर कांउसिल हाउस की सहमति के ही उक्त आदेश जारी कर कमर्शियल नक्शा फीसों में बढ़ौतरी कर दी थी। जो बढ़ौतरी करीब 1700 रुपए बढ़ाकर 4690 रुपए प्रति वर्ग गज कर दी गई। विभागीय सूत्रों की माने तो कमर्शियल प्लॉटों की नक्शा फीस जो मौजूदा समय में 4690 रुपए प्रति वर्ग के हिसाब से वसूली जा रही है जिसमें सीएलयू, ईडीसी और अन्य चार्जेज शामिल हैं। इसके नक्शा पास के बाद इमारत रेगुलराइज मानी जाती है। यह रेट सरकार की ओर से ही फिक्स किए गए थे। जो खरड़ की अनाधिकृत कॉलोनियों में लागू हैं, जबकि रेगुलराइज एरिया में पुरानी दरें करीब 800 रुपए वर्ग गज से ही नक्शे पास किए जा रहे हैं। ऐसे में अनधिकृत काॅलोनी की कमर्शियल फीस कम करवाने के लिए कमल किशोर का अड़ियल रवैया समझ से परे है।

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