प्रदेश सरकार ने कृषि भूमि के अधिकतम उपयोग के लिए, बंटाईदार एवं भूमि-स्वामी के अधिकारों एवं हितों के संरक्षण के लिए मध्यप्रदेश भूमि स्वामी एवं बटाईदार के हितों का संरक्षण अधिनियम-2016 बनाया है। इसके तहत अब आदिम जनजाति वर्ग का भूमिस्वामी अधिसूचित क्षेत्र में स्थित अपनी कृषि भूमि केवल अधिसूचित क्षेत्र के आदिम जनजाति के सदस्य को ही बंटाई पर दे सकेगा।
अधिसूचित क्षेत्र में शामिल खरगोन जिले में 20 लाख आबादी का 23 प्रतिशत आदिवासी जनसंख्या है। यहां झिरन्या, भगवानपुरा, भीकनगांव, सेगांव मंे 7 प्रतिशत से ज्यादा आदिवासियों की जमीन पर बंटाई का काम किया जाता है। कुछ मामलों में विवाद जैसी स्थिति भी बनती है। अब नए अधिनियम से आदिवासियों को फायदा होगा। अधिनियम 9 मई से प्रदेश में प्रभावशील हो गया है। अधिनियम के लागू होने से भूमि-स्वामी बेफिक्र होकर जमीन बटाई पर दे सकेगा। इससे जमीन पड़त में नहीं पड़ी रहेगी। कृषि भूमि का अधिकतम उपयोग हो सकेगा। इससे कृषि उत्पादकता बढ़ेगी। फिलहाल जिले में झिरन्या, भीकनगांव व भगवानपुरा व सेगांव में 7 प्रतिशत से ज्यादा आदिवासियों की जमीन को बंटाई पर लेकर खेती की जा रही है।
विवाद की स्थिति में तहसीलदार जांच कर मामले का निराकरण करेगा। मामले का निराकरण 60 दिवस में करना होगा। विलंब पर 100 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से अधिकतम 5 हजार रुपए तक का जुर्माने लगाने का प्रावधान है।
प्राकृतिक आपदा में दोनों पक्षकार को मिलेगी सहायता
प्राकृतिक आपदा या अन्य किसी कारण से फसल हानि पर मिलने वाली सहायता तथा बीमा कंपनी से मिलने वाली दावा राशि अनुबंध के आधार पर भूमि-स्वामी और बंटाईदार के बीच बंटेगी। बंटाईदार की मृत्यु पर अनुबंध में उल्लेखित अधिकार उसके विधिक उत्तराधिकारी को मिलेंगे।
बेची नहीं जा सकती जमीन
अधिसूचित क्षेत्र होने की वजह से जिले में आदिवासी की जमीन आदिवासी ही खरीद सकता है। अन्य वर्ग का कोई व्यक्ति जमीन खरीदकर अपने नाम पर नामांतरण नहीं करवा सकता। कई बार अन्य वर्ग के लोग आदिवासी की जमीन बंटाई पर लेकर खेती करते हैं, लेकिन अब यह भी नहीं कर पाएंगे।
अनुबंध अधिकतम 5 वर्ष, बीच में तोड़ा तो जुर्माना
भू-स्वामी एवं बंटाईदार के मध्य अनुबंध निर्धारित प्रारूप में सादे कागज पर तीन प्रति में होगा। एक-एक प्रति दोनों पक्षकारों को और एक प्रति तहसीलदार को दी जाएगी। अनुबंध अधिकतम 5 वर्ष के लिए होगा। पक्षकार अनुबंध का नवीनीकरण कर सकेंगे। बंटाईदार को कृषि कार्य, सुधार और कृषि से संबंधित कार्य करने का अधिकार होगा। अनुबंध की अवधि समाप्त होते ही भूमि पर स्वमेव भूमि-स्वामी का कब्जा हो जायेगा। इसमें किसी आदेश की जरूरत नहीं होगी। तहसीलदार अनुबंध तोड़ने वाले पर 10 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर की दर से जुर्माना लगा सकेंगे। बंटाईदार द्वारा अनुबंध की समाप्ति के बाद कब्जा नहीं छोड़ने पर उसे 10 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर जुर्माने के साथ ही तीन माह तक की सजा के प्रावधान भी है।