नीले झंडों के बीच गूंजे भीम के जयकारे
जब तक सूरज चांद रहेगा, बाबा साहेब का नाम रहेगा, एक दो तीन चार बाबा साहेब की जय-जयकार, विश्व का सबसे ज्ञानी कौन बाबा साहेब जैसे नारे शनिवार को शहर में गूंजे। उत्कृष्ट स्कूल से अनुसूचित जाति जनजाति संयुक्त मोर्चा सहित कई संगठनों ने शोभायात्रा निकाली। मुख्य मार्गों से शोभायात्रा टीआईटी कॉम्प्लेक्स पहुंची। यहां सभा हुई।
उत्कृष्ट स्कूल मैदान से शाम 4.30 बजे शोभायात्रा निकली। हाथों में नीला झंडा लेकर निकले बाबा साहेब के अनुयायियों ने जयकारे लगाए। बग्घी में बाबा साहेब की झांकी थी। रास्तेभर बाबा साहेब के आदमकद बैनर, पोस्टरों से सड़कें पटी रही। कई लोग हाथों में नीला झंडा एवं तीर कमान लिए पारंपरिक वेषभूषा में चल रहे थे। विद्यार्थियों ने रास्तेभर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी। ढोल-मांदल की थाप व सुप्रसिद्ध आदिवासी लोकगीत गायक रघुनाथ वसानिया से लोकगीतों की प्रस्तुतियां दी। समाजजन झूमे। कई संगठन व समाज संगठनों के साथ ही राजनैतिक लोगों ने भी शोभायात्रा का स्वागत किया। मोर्चा जिलाध्यक्ष रामेश्वर बड़ोले, संरक्षक राजेंद्र पंवार, विजय कोचले, नरेंद्र आर्य, एसके अटोदे, पूनमचंद गांगले, गोविंद खेड़े, जेपी गोखले, शिवराम कृष्णन, लोकेंद्रसिंह रावत, शैलेंद्र कछवाहे, संदीप डूडवे, शिवभानूसिह मंडलोई सहित सैकड़ों समाजजन शामिल हुए।
शोभायात्रा निकाली, ढोल-मांदल पर खूब झूमे समाजजन, टीआईटी कॉम्प्लेक्स में हुई सभा
शोभायात्रा में बड़ी संख्या में समाजजन व अनुयायी शामिल हुए।
संविधान से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं
शोभायात्रा टीआईटी पहुंची। यहां सभा में नागपुर के सतीश पेंड्राम ने कहा- बाबा साहेब ने कई साल पहले जातिवाद और सामाजिक एकता के लिए प्रयास किए। उन्होंने महिलाओं, पिछड़ों को अधिकार दिलाए। बाबा साहेब को लोग केवल दलित व आदिवासी का मसीहा मानते हैं। यह गलत है। उन्होंने पिछड़ों के लिए बहुत किया है। छिंदवाड़ा के सुरेश पासवान ने बाबा साहेब के संघर्षों व बलिदानों को याद रखो कोई मुसीबत नहीं आएगी। उनके संविधान से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे।