शिव पुराण कथा : संत शिवोहम भारती बोले, विश्लेषण भी किया
भास्कर संवाददाता | खरगोन
नम: शिवाय जीवन योग के अभ्यास से हम डिप्रेशन से मुक्त हो सकते हैं। मंत्र धारक निरोग रहकर उद्वेग शून्य जीवन व्यतीत करता है।
यह बात खरगोन के श्रीराम धर्मशाला मंे चल रही शिव पुराण कथा के छठे दिन संत शिवोहम भारती महाराज (एक रोटी आश्रम, ओंकारेश्वर) ने सोमवार को कही। संत आंखांे मंे पट्टी बांधकर भक्तांे को कथा का रसपान करवा रहे हैं। उन्हांेने कहा भगवान शिव के पंचमुख न, म:, शि, वा और य है। न का पूर्ण रूप नमस यानी आकाश होता है। म का मरुत-वायु, शि का शिखावान, व का वारी और य का यज्जा यानी पृथ्वी है।
शिवभक्ति में नृत्य करने लगे दृष्टिहीन कलाकार
शिवकथा के छठे दिन भारतेंदु अंध आश्रम विद्यालय कलकत्ता के दिव्यांग कलाकार संगीतमय प्रस्तुतियांं दी। कुछ कलाकार युवा शिवभक्ति में लीन होकर मंच के पास नृत्य करने लगे।