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आरक्षित वर्ग के लिए डिजिटल जाति प्रमाण-पत्र अनिवार्य, केंद्रों पर भीड़

3 वर्ष पहले
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नेशनल जयस संरक्षक पंवार ने पत्र लिखकर जताई नाराजगी, दो माह का समय मांगा

भास्कर संवाददाता | खरगोन

अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के लिए शासन स्तर पर हस्तलिखित मैनुअल जाति प्रमाण पत्र के बजाय डिजिटल जाति प्रमाण पत्र अनिवार्य किया गया हैं।

नए निर्देशों के मुताबिक विद्यार्थियों के साथ इस वर्ग के सरकारी कर्मचारियों को भी डिजिटल प्रमाण-पत्र समयसीमा में देना होगा। ऐसा नहीं करने पर वेतन भुगतान तक रोका जा सकता हैं वहीं विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति सहित अन्य सुविधाओं से वंचित किया जा सकता हैं। इसके चलते बड़ी संख्या में लोक सेवा केंद्रों पर लोग पहुंच रहे हैं। डिजिटल जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए कई जटिल प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ रहा है। नेशनल जयस संरक्षक राजेन्द्रसिंह पंवार ने शासन को पत्र लिखकर मांग की है कि विद्यार्थी, पालकों और नौकरी पेशा वर्ग को डिजिटल जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए दो-तीन माह का समय दिया जाए। इस दौरान पूर्व से निर्धारित प्रकिया से जारी प्रमाण पत्र को मान्य किया जाए। संरक्षक ने बताया नए शैक्षणिक सत्र में प्रवेश प्रक्रियाओं के दौरान छात्र-छात्राओं को आवश्यक दस्तावेज में डिजिटल जाति- प्रमाण पत्र अनिवार्य किया हैं।

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