आंसू के भावभरे दो-तीन शब्द भगवान को रिझाने के लिए काफी है। जबकि स्वर्ण थाली पर रखकर हजारों बार अभिषेक करने पर भी कुछ प्राप्त नहीं होता। भगवान को तो भाव से प्राप्त किया जा सकता है। यह बात संत शिवाेहम भारती ने श्रीराम धर्मशाला में शिवपुराण कथा के पांचवें दिन के प्रवचन में कही।
उन्होंने कहा छोटा-सा प्रलोभन भी बड़ी फूट डाल देता है। गंगोत्री में 20 साल से एकसाथ रहने वाले दो साधुओं के बीच में एक नूतन कोपिन के फूट डालने का वृतांत सुनाया। कथा में कार्तिक स्वामी का जन्म, तारकासुर के साथ युद्ध व उसकी मृत्यु, श्रीगणेश जन्म, गणाध्यक्ष पद प्राप्ति एवं विवाह, त्रिपुरासुर, जलंधर, शंखचूड़, अंधकासुर, गजासुर का वध एवं कंडकेश्वर की महिमा का वर्णन किया गया। इसी के साथ कुमारखंड, युद्धखंड व रुद्रसंहिता पूर्ण हुई।
पांचवें दिन कुमारखंड व रुद्रसंहिता सुनाई, ओंकारेश्वर के संत शिवाेहम भारती ने कहा-
शिवपुराण सुनाते संत शिवोहम भारती।
वृषोत्सर्ग पर्व : गाय व नंदी की शोभायात्रा निकाली
खरगोन | तालाब चौक मंे रविवार को पितरांे की तृप्ति के लिए वृषोत्सर्ग पर्व मनाया। दोपहर 11 बजे नंदी व गाय की शोभा यात्रा निकाली और कान्हां को छप्पन भोग लगाकर प्रसादी िवतरण किया। श्री गोवर्धन गोशाला समिति मंे पुरुषोत्तम मास मंे पंिडत रूपेश राणा के सानिध्य मंे यह कार्यक्रम हुआ। आयोजक रामचंद्र जय किसन महाजन, रमणलाल महाजन, कैलाश महाजन, दाऊलाल और राजेंद्र महाजन ने बताया पितरांे की तृप्ति के लिए वृषोत्सर्ग पर्व मनाया। माली मोहल्ले से गोशाला तक बैंड-बाजे के साथ शोभायात्रा निकाली गई। छप्पन भाेग के बाद लोगों को प्रसादी वितरण की गई। लोगांे को गोपालन का महत्व बताया। कार्यक्रम मंे नपा अध्यक्ष विपिन गौर, गोशाला अध्यक्ष नरेंद्र गांधी, सचिव द्वारकादास भंडारी आिद उपस्थित थे।
खरगोन | तालाब चौक मंे रविवार को पितरांे की तृप्ति के लिए वृषोत्सर्ग पर्व मनाया। दोपहर 11 बजे नंदी व गाय की शोभा यात्रा निकाली और कान्हां को छप्पन भोग लगाकर प्रसादी िवतरण किया। श्री गोवर्धन गोशाला समिति मंे पुरुषोत्तम मास मंे पंिडत रूपेश राणा के सानिध्य मंे यह कार्यक्रम हुआ। आयोजक रामचंद्र जय किसन महाजन, रमणलाल महाजन, कैलाश महाजन, दाऊलाल और राजेंद्र महाजन ने बताया पितरांे की तृप्ति के लिए वृषोत्सर्ग पर्व मनाया। माली मोहल्ले से गोशाला तक बैंड-बाजे के साथ शोभायात्रा निकाली गई। छप्पन भाेग के बाद लोगों को प्रसादी वितरण की गई। लोगांे को गोपालन का महत्व बताया। कार्यक्रम मंे नपा अध्यक्ष विपिन गौर, गोशाला अध्यक्ष नरेंद्र गांधी, सचिव द्वारकादास भंडारी आिद उपस्थित थे।
गुरमत समागम : भला कर गुस्सा मन ना हंडाए...
खरगोन | क्या खूब गावता है, हर का नाम मेरे मन भावता हैं...। फरीदा बुरे दा, भलाकर गुस्सा मन ना हंडाए....। देखो भाई ज्ञान की आई आंधी, डगमग छाड़ रे मन बौरा जैसे शबद से रविवार को श्री गुरुद्वारा साहेब गुंजायमान हुआ। अवसर था गुरमत समागम का। यहां खालसा कॉउंसिल गुरमत चैरिटेबल ट्रस्ट अमृतसर व हजूरी रागी ज्ञानी गुरुदेवसिंह के विशेष सहयोग से दूसरी गुरु शब्द प्रचार यात्रा शहर में पहुंची। जिसका शब्द कीर्तन, फूल मालाओं के साथ श्री गुरद्वारे साहेब में संगत ने अगवानी की। कीर्तनकार ज्ञानी गुरुदेव सिंह ज्ञानी, जसविंदरसिंह दर्दी, ज्ञानी गुलाब सिंह, ज्ञानी हरविंदर सिंह, ज्ञानी बलविंदर सिंह व साथियों ने कीर्तन व कथा के माध्यम से गुरु की वाणी का जसगायन कर संगत को निहाल किया। सुबह 10 से दोपहर 1.30 बजे तक समागम हुआ। इसके बाद गुरु का अटूट लंगर संगत के लिए बरता गया। इसकी सेवा चावला परिवार ने की। इस दौरान समाजसेवी रवि जोशी का सम्मान किया गया।
खरगोन | क्या खूब गावता है, हर का नाम मेरे मन भावता हैं...। फरीदा बुरे दा, भलाकर गुस्सा मन ना हंडाए....। देखो भाई ज्ञान की आई आंधी, डगमग छाड़ रे मन बौरा जैसे शबद से रविवार को श्री गुरुद्वारा साहेब गुंजायमान हुआ। अवसर था गुरमत समागम का। यहां खालसा कॉउंसिल गुरमत चैरिटेबल ट्रस्ट अमृतसर व हजूरी रागी ज्ञानी गुरुदेवसिंह के विशेष सहयोग से दूसरी गुरु शब्द प्रचार यात्रा शहर में पहुंची। जिसका शब्द कीर्तन, फूल मालाओं के साथ श्री गुरद्वारे साहेब में संगत ने अगवानी की। कीर्तनकार ज्ञानी गुरुदेव सिंह ज्ञानी, जसविंदरसिंह दर्दी, ज्ञानी गुलाब सिंह, ज्ञानी हरविंदर सिंह, ज्ञानी बलविंदर सिंह व साथियों ने कीर्तन व कथा के माध्यम से गुरु की वाणी का जसगायन कर संगत को निहाल किया। सुबह 10 से दोपहर 1.30 बजे तक समागम हुआ। इसके बाद गुरु का अटूट लंगर संगत के लिए बरता गया। इसकी सेवा चावला परिवार ने की। इस दौरान समाजसेवी रवि जोशी का सम्मान किया गया।