पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

इफ्तार कराने वाले को मिलता है रोजे का सबाव

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
खरसावां| रमजान अज्मल और बरकत वाला महीना है। इस महीने की एक रात (शबेकद्र) हजार महीनों से बेहतर मानी जाती है। इस रात में इबादत का अपना अलग ही महत्व है। दुआएं तो कुबूल होती है, आखिरत में भी इंसान को कामयाबी हासिल होती है। रमजानुल मुबारक के रोजे अल्लाह तआला ने फर्ज किया है। इसकी रातों में बारगाहे इलाही में खड़े होकर नमाजे तरावीह पढ़ने को नफ्ल इबादत मुकर्रर किया है। इसका बहुत बड़ा सबाव है। हर मुसलमान को पांचों वक्त की नमाज के अलावा तरावीह की नमाज भी अता करनी चाहिए। जो शख्स इस महीने में अल्लाह रब्बुल आलमीन की रजा और उसका कुर्ब हासिल करने के लिए कोई गैर फर्ज इबादत (सुन्नत या नफ्ल) अदा करेगा तो उसे दूसरे वक्त के फजीं के बराबर उसका सबाव मिलेगा। इस महीने फर्ज अदा करने का सवाब अन्य महीनों के 70 फजों के बराबर मिलेगा। रमजान को सब्र का महीना भी कहा जाता है। सब्र करने वालों को जन्नत नसीब होती है। यह हमदर्दी और गमख्वारी का भी महीना है। इसमें मोमिन बंदों के जिक में इजाफा होता है।

खबरें और भी हैं...