सिद्धू के इस्तीफे का सवाल ही पैदा नहीं होताः कैप्टन
निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लंबित केस के मद्देनजर उनके द्वारा कैबिनेट से इस्तीफा देने के कयासों को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने यह कहते हुए खत्म कर दिया है कि सिद्धू को मंत्री पद छोड़ने के लिए कहने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
सीएम ने कहा कि सड़क पर झगड़े से संबंधि तमामले में सुप्रीम कोर्ट ने 2007 में सिद्धू की सजा पर रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट के सजा वाले आदेशों को चुनौती देने संबंधी सिद्धू की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अभी फैसला सुनाना है। उन्होंने कहा कि इस 30 साल पुराने केस में राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ अपना पक्ष दोहराए जाने के आधार पर मंत्री सिद्धू से इस्तीफा मांगने का सवाल ही पैदा नहीं होता। सजा पर रोक के कारण सिद्धू को मंत्रालय में शामिल करने के दौरान न तो कोई रुकावट थी और न ही अब उनके मंत्री बने रहने में कोई अड़चन है। सिद्धू से इस्तीफा मांगे जाने से संबंधित रिपोर्टों और विपक्ष द्वारा कैबिनेट मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाए जाने के बाद सीएम ने अपना यह स्पष्टीकरण दिया है।
सुखबीर बादल को जवाब: मुझे नसीहत की जरूरत नहीं
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उनके काम की शैली पर शिरोमिण अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल की हास्यस्पद और बेतुकी बयानबाज़ी पर कहा कि उनको पूर्व उप-मुख्यमंत्री से सबक लेने की ज़रूरत नहीं है जिसने अकाली-भाजपा के 10 वर्षों के शासन के दौरान दुषप्रबंधों से राज्य का बेड़ा गरक कर दिया। आज यहां जारी बयान में मुख्यमंत्री ने कहा कि सुखबीर सिंह बादल शासन पक्ष से बुरी तरह नाकाम सिद्ध हुआ, जिसका प्रमाण पिछली सरकार के समय राज्य में फैली अंधेरगर्दी से मिलता है, जिस के कारण अकाली दल के प्रधान को किसी के शासन चलाने के ढंग पर किंतु करने का कोई हक नहीं है। कैप्टन ने कहा कि सुखबीर का बयान बिल्कुल बेतूका है, जिससे पंजाब के राजनैतिक धरातल छिन जाने से अकाली दल की निराशा के कारण उसमें पैदा हुई बेचैनी से अलावा और कुछ नहीं है।