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संगरूर में अंग्रेजी में लिखे नाम वाले बोर्डों पर कालिख पोती

3 वर्ष पहले
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संगरूर| पंजाबी मां बोली सत्कार कमेटी की ओर से पंजाबी को प्रमुखता दिलवाने के लिए शुरू की गई मुहिम के तहत शहर की सड़कों पर लगे अंग्रेजी के बोर्डों पर कालिख पोत दी गई। कमेटी ने ऐलान किया है कि जब तक पंजाबी भाषा को राज्य भाषा के तौर पर लागू नहीं किया जाता तब तक संघर्ष जारी रहेगा। पटियाला रोड पर अंग्रेजी में लिखे गांव के नाम वाले बोर्ड, शैक्षणिक संस्थाओं, मैरिज पैलेस, पीजीआई अस्पताल घाबदा व नेशनल हाईवे पर लगे बोर्डों पर कालिख पोती गई। कमेटी के नेता लक्खा सिधाणा और राजविंदर सिंह रायेखाना ने कहा कि वह किसी भी भाषा के खिलाफ नहीं हैं परंतु पंजाब में पंजाबी भाषा को पहला स्थान मिलना चाहिए। पहले स्थान पर पंजाबी भाषा हो व नीचे अन्य भाषा में लिखा जाए। उन्होंने बताया कि कमेटी द्वारा बठिंडा, मानसा, संगरूर, पटियाला, पठानकोट, लुधियाना आदि जिलों में कालिख पोती जा चुकी है। उन्होंने पंजाब सरकार की आलोचना करते कहा कि एक तरफ तो मातृ भाषा एकट 1967 बना हुआ है और भाषा विभाग की ओर से पत्र जारी करके पंजाब के सारे दफ्तरों को पंजाबी भाषा को प्रमुखता देने के आदेश दिए गए हैं परंतु इसे लागू नहीं किया जा रहा।

22 डीसी को दिए जा चुके हैं मांगपत्र | पंजाबी मां बोली सत्कार कमेटी सीएम, राज्यपाल, 22 जिलों के डिप्टी कमिश्नरों को मांगपत्र दे चुकी है परंतु कोई सुनवाई न होने पर उसने बोर्डों पर कालिख पोत दी। कमेटी का कहना है कि बंगाल में बंगाली, महाराष्ट्र में मराठी, गुजरात में गुजराती भाषा पहले स्थान पर है तो पंजाब में पंजाबी भाषा के साथ ही क्यों पक्षपात हो रहा है।

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