क्रिकेट और भोजन हमेशा से भारत के सबसे बड़े जुनून रहे हैं। मैं भी इसका अपवाद नहीं हूं। अपने घर में भी मुझे लाड़-प्यार मिल जाता (हमेशा नहीं! ) है बावजूद इस तथ्य के मैंने कुछ भी खास नहीं किया और पूरी शाम रसगुल्ला और गुलाब जामुन के साथ इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के मैच देखता रहा। स्वीट्स ऐसे पात्र में थे, जो इतने बड़े नहीं थे कि आपको अहसास हो कि उसमें चासनी थी ही नहीं और इतना छोटा भी नहीं था कि आपको यह अपराध बोध सताए कि आप बहुत ज्यादा चीनी ले रहे हैं। मुझे दोनों ही मिठाइयां पसंद है, यदि उन्हें पारदर्शी बाउल में परोसा जाए लेकिन, मेरी कुछ विशिष्ट शर्तें हैं। रसगुल्ले की चासनी में गुलाब की एक पंखुड़ी तैरती हो, जबकि गुलाब जामुन की चासनी में गुलाब की पंखुड़ी के साथ केसर के कुछ रेशे भी डले हों। लेकिन, गरम गुलाब जामुन में महत्वपूर्ण यह है कि इस पर भुने हुए बादाम के चुरे की बजाय उनकी कतरन हो। यह जेम्स बॉन्ड फिल्मों की तरह मेरी सिग्नेचर लाइन है, जिनमें जेम्स बॉन्ड कहता है, ‘माय ड्रिंक्स हेज़ टू बी स्टर्ड नॉट शेकन।’ जब डिश मुझे परोस दी जाती है और मैं टीवी से चिपक जाता हूं तो मेरी प|ी व बेटी मुझे कुछ दूरी से देखती हैं और बिना चूके कमेंट करती हैं, ‘चेशे कैट (‘एलिस इन वंडरलैंड’ की मुस्कराने वाली बिल्ली) को देखो तो कितनी प्रसन्नता से मुस्करा रही है!’यही वजह है कि इन दिनों आईपीएल मैचों के दौरान दिखाया जा रहा 20 सेकंड का सबसे क्यूट विज्ञापन मुझे बहुत पसंद है, जिसमें एक मध्य आयुवर्ग का व्यक्ति फूड डिलिवरी सर्विस देने वाले एप से सिर्फ एक गुलाब जामुन का ऑर्डर देता है और डिलिवरी होने पर तत्काल मुंह में डाल लेता है। उसकी प|ी को इसका पता भी नहीं चलता। विज्ञापन में पात्रों के बीच कोई संवाद नहीं है लेकिन, अभिनेताओं की मोहक भावमुद्रा और क्रिकेट मैच के दौरान टीवी पर चलती हुई कमेंटरी यह संदेश दे देती है कि यह ब्रांड अपने ग्राहकों के छोटे से छोटे ऑर्डर की भी डिलिवरी करता है।
उस विज्ञापन में बुजुर्ग ठीक उस वक्त दरवाजा खोलता है, जब डिलिवरी मैन डोरबेल बजाने वाला ही होता है। जैसे ही दरवाजा खुलता है। कमेंटरी का हल्का-सा स्वर सुनाई देता है ‘उसे सिंगल की तलाश है।’ डिलिवरी मैन उसे छोटा-सा पैकेट देता है, जो इसे खोलता है और उसमें ठीक आकार के पात्र में एक गुलाब जामुन रखा हुआ है। बुजुर्ग गुलाम जामुन को ठीक वहीं खा जाता है। डिलिवरी बॉय वहां जड़ होकर खड़ा है, उसे पता नहीं कि इस पर कैसी प्रतिक्रिया व्यक्त करें।
वह एक भी शब्द नहीं कहता। लेकिन, यदि आप उसकी आंखें पढ़ सकें तो वह कह रहा है, ‘मोटू क्या खाया’ (आपने इसमें अनुचित-सा शब्द ‘सा..! भी जोड़ दिया होगा!)’ लेकिन, अपनी इस सोच पर वह हंस भी नहीं सकता, क्योंकि बुजुर्ग उसका ग्राहक है। बुजुर्ग जरूर ‘चेशे कैट’ की तरह मुस्कराया, क्योंकि उसने पसंदीदा मिठाई खाई है और वह भी प|ी को पता चले बिना। बुजुर्ग दरवाजा धीरे से बंद करता है और लिविंग रूम में अपने सोफे पर आ जाता है और फिर आरामदायक ढंग से बैठ जाता है। 40 साल से उसकी जीवनसंगिनी रही प|ी उसे अनूठे ढंग से देखकर सोचती हैं, ‘कुछ तो गड़बड़ है लेकिन, पता नहीं चल रहा है।’ टीवी पर कमेंटेटर कह रहा है, ‘और उसने चुपके से सिंगल चुरा लिया।’ जहां कैमरा लगातार संतुष्ट बुजुर्ग को दिखा रहा है, कमेंटेटर कहना जारी रखता है, ‘वॉट ए डिलिवरी।’ बेशक ब्रैंड ने हम भारतीय ग्राहकों की फूड ऑर्डर करने की आदत बदल दी है।
फंडा यह है कि  आपका विज्ञापन हर बार देखे या सुने जाने पर मुस्कान लाता है, तो ग्राहक बनाने की इसकी क्षमता अधिक होगी।
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एन. रघुरामन
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