उषा अनंतसुब्रमनियन- सीईओ, इलाहाबाद बैंक
जन्म- 1 अक्टूबर 1960
शिक्षा- मद्रास यूनिवर्सिटी से सांख्यिकी में पीजी, मुंबई यूनिवर्सिटी से प्राचीन भारतीय संस्कृति में पीजी।
क्यों चर्चा में- बतौर सीईओ इनके सारे अधिकार छीन लिए गए हैं।
उषा के साथ कई प्रथम जुड़े हुए हैं। 2013 के बजट में जब देश की पहली महिला बैंक की घोषणा की गई तो इसकी पहली प्रमुख उषा बनाई गईं। इसके बाद इंडियन बैंक एसोसिएशन की वे पहली महिला अध्यक्ष रहीं। अब वे किसी सरकारी बैंक की पहली महिला प्रमुख हैं, जिनके खिलाफ सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की है। नीरव मोदी जो बैंकों का पैसा लेकर भाग गया है, उस मामले में उषा का नाम भी सामने आया है।
दक्षिण भारतीय उषा की पहली नौकरी जीवन बीमा निगम की थी। 1982 में वे पहली बार बैंक में आई। दक्षिण भारतीयों में अमावस्या को शुभ माना जाता है, लिहाजा नौकरी जॉइन करने के लिए इन्होंने अमावस्या का दिन चुना। लेकिन बैंक में उनके अफसर उत्तर भारतीय थे, जहां अमावस्या को अच्छा नहीं माना जाता है। वे कहने लगे कि यह दिन ठीक नहीं है, मैं घर चले जाता हूं।
नौकरी के शुरुआती दिनों में उषा के साथ एक वाकया हुआ, जिसे वे कभी भूल नहीं पाती हैं। वे मुंबई में बैंक ऑफ बड़ौदा की कफ परेड ब्रांच में काम कर रही थीं। तभी एक युवा, जो 22-25 वर्ष का था, उनके समक्ष आकर खड़ा हो गया। वह मछुआरा था। अपना काम खत्म करके लौटा था। उसकी पतलून भी गिली थी और मछली की गंध उसके पास से आ रही थी। जिस बिल्डिंग में बैंक थी, उसके तल मंजिल पर दो अन्य बैंकों की शाखाएं थीं, लेकिन उस मछुआरे की बात पर किसी ने गौर नहीं किया। लिहाजा वह बैंक ऑफ बड़ौदा में आ गया। उसने उषा से पूछा कि वह लोन चाहता है, जो उसे मिल नहीं रहा है। वह किस तरह से मदद कर सकती हैं। तब उषा को लगा कि उन्हें इस नौकरी के जरिए ऐसा अवसर मिला है, जिसमें वे देश के दोनों पक्ष गरीब और अमीर दोनों को लोन दे सकती हैं।