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छीपानेर माइक्रो लिफ्ट सिंचाई परियोजना से जिले के 15 गांवों को हटाया, चार नए जोड़े

3 वर्ष पहले
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देवास और सीहोर जिले के 76 गांवों के किसानों को लाभान्वित करने के लिए प्रस्तावित छीपानेर माइक्रो उद्वहन सिंचाई योजना (माइक्रो लिफ्ट इरिगेशन) में बड़ा बदलाव कर दिया गया है। जिले के खातेगांव क्षेत्र के 15 गांवों को हटा दिया गया है। हालांकि, चार नए गांव जोड़े गए हैं लेकिन 15 गांवों को हटाने से नाराजगी सामने आ रही है। इधर, विधायक आशीष शर्मा मामले में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से मिले हैं, उन्हें आश्वासन मिला है। संभावना है कि अगले सप्ताह में इस परियोजना का भूमिपूजन होगा। इस परियोजना से 35000 हेक्टेयर भूमि को सिंचित करना प्रस्तावित की है।

दरअसल, सरकार द्वारा डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट में देवास जिले के 50 और सीहोर जिले के 26 गांवों को शामिल किया था, बाद में जब टेंडर जारी करने के बाद किए गए सर्वे में क्रमश: यह संख्या घटकर 39 और 30 रह गई। डीपीआर में शामिल किए गए खातेगांव तहसील के 15 गांवों का नाम सर्वे सूची में नहीं है जबकि दोनों जिलों के 4-4 नए गांव जरूर जोड़े गए हैं।

परियोजना से 35000 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी, अगले सप्ताह हो सकता है भूमिपूजन
441.54 करोड़ रु. में लिया ठेका, तीन साल में काम पूरा करने का दावा
परियोजना की क्रियान्वयन एजेंसी नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण ने डिजाइन, क्रियान्वयन एवं योजना के निर्माण के बाद संचालन कार्य के लिए शापूरजी पलौंजी एंड कम्पनी को अधिकृत किया है। विभाग द्वारा जारी अनुमानित लागत 516.11 करोड़ रुपए से कम यानी बिलो रेट में 441.54 करोड़ में कम्पनी ने यह काम लिया है। निर्माण के बाद यही 2 साल तक इसका संचालन करेगी। कंपनी के मुताबिक अलग-अलग चरणों में 3 साल में निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। एमएस और एचडीईपी पाइप लगाए जाएंगे। परियोजना की उम्र 50 साल होगी, इंजीनियर्स की माने तो प्रॉपर मेंटेनेंस होने पर यह 100 साल तक काम आ सकती है।

योजना में प्रति हेक्टेयर सिंचाई की लागत लगभग 1.26 लाख रुपए आएगी
नए सर्वे के अनुसार देवास जिले की खातेगांव तहसील के 39 गांव एवं सीहोर जिले की नसरुल्लागंज तहसील के 30 गांवों की 35 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि नर्मदा नदी से जल उद्वहन कर ड्रिप/स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति से सिंचित की जाएगी। प्रणाली के लिए पर्याप्त दबाव (न्यूनतम 20 मीटर हेड) के तहत 2.5 हेक्टेयर तक मुख्य पाइप एवं वितरण नेटवर्क के माध्यम से जलापूर्ति की जाएगी। सरकार को योजना में प्रति हेक्टेयर सिंचाई की लागत लगभग 1.26 लाख रुपए आएगी। सिंचाई के लिए 120 दिन के रबी मौसम में 37 सेमी तक पानी दिया जा सकता है। हालांकि किसानों को किस दर से पानी दिया जाएगा यह अभी तय नहीं है। इस योजना में पानी का स्टोरेज नहीं किया जाएगा इसलिए जमीन अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं होगी।

ऐसे होगा काम : ग्राम इटारसी लाएंगे 33 केवी ट्रांसमिशन लाइन

देवास जिले में तीन राइजिंग मेन के साथ पम्प हाउस ग्राम चिचली, करोंद माफी और पिपलनेरिया एवं सीहोर जिले में छीपानेर और चौरसाखेड़ी के पास लगाए जाएंगे।

पम्प हाउस, सब-स्टेशन, वाल्व के चेंबर एवं स्टाफ के आवास के निर्माण के लिए लगभग 8.04 हेक्टेयर शासकीय/निजी भूमि की स्थायी आवश्यकता होगी। वन भूमि का उपयोग नहीं किया जाएगा।

पांच पंप हाउस के लिए अलग-अलग 33 केवी ट्रांसमिशन लाइन ग्राम इटारसी से लाई जाएगी।

ट्रांसमिशन लाइन की कुल लंबाई 29.84 किमी होगी। सड़क किनारे आरसीसी के 429 पोल लगाए जाएंगे, एक भी पोल वन भूमि पर खड़ा नहीं किया जाएगा। जगह के मुताबिक मेन पाइप 260 एमएम से 1300 एमएम तक होंगे, जिन्हें जमीन से 1 मीटर रखा जाएगा।

परियोजना में राइजिंग मेन, ग्रेविटी मेन एवं उसके नेटवर्क को बिछाने हेतु की गई खुदाई से निकलने वाली लगभग 4 लाख घनमीटर मिट्टी के सुरक्षित डिस्पोजल की व्यवस्था भी की जाएगी। उत्खनन के दौरान कृषि भूमि की ऊपर की उपजाऊ मिट्टी को अलग रखा जाएगा।

विभाग के संपर्क में हूं

योजना में खातेगांव के कुछ गांवों के कम होने की जानकारी मिलने के बाद से मैं मुख्यमंत्री और विभाग के सतत संपर्क में हूं। आश्वसन मिला है कि योजना में शामिल गांवों के अलावा भी जिन गांवों में सिंचाई के लिए पानी की जरूरत होगी उन्हें भी इस योजना से जोड़ दिया जाएगा।’ आशीष शर्मा, विधायक-खातेगांव

योजना में देवास जिले के ये 39 गांव लाभान्वित होंगे
दैयत, चिचली, पिपलिया घाघरिया, अकावल्या, धुंध्याखेड़ी, मवासा, सोनगांव, गुन्नास, बीजापुर, मालागांव, दीपगांव, गुलगांव, कांकरिया, जियागांव, गुजरगांव, पिपल्या नानकार, खुबगांव, बुराड़ा, करोंद माफी, मवासा, नवलगांव, इकलेरा, बमनगांव, कुनगासा, रिजगांव, बेलखां, खल, सोनखेड़ी, देवलां, बिजलगांव, पिपलनेरिया, खेड़ी, नयागांव, कोलारी, खिड़क्या, बापचा, खारदा, बोरदा, बचखाल।

ये 15 गांव सर्वे के बाद कट गए : नेमावर, गुराडिया, दुलवां, कणां, संदलपुर, जामनेर, रेहटी, भंवरास, कुंडगांव खुर्द/बुजुर्ग, तुरनाल, मुरझाल, बेहडी, पान्दा, भुकिया, तिवडिया।

ये 4 गांव जोड़े गए : गुलगांव, पिपल्या नानकार, मवासी, नयागांव ये चार गांव पूर्व में नहीं थे जिन्हें जोड़ा गया है।

सिर्फ रबी सीजन में ही मिलेगा पानी
परियोजना क्षेत्र में लगभग 80 प्रतिशत गेहूं और चने की फसल ली जाती है। इस योजना में सिर्फ रबी की फसलों के दौरान ही सिंचाई के लिए पानी प्रदान किया जाएगा।

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