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एफडी जरूरी करने से प्याज नीलामी में व्यापारी नहीं ले रहे रुचि, मंडियों में शुरू नहीं हुई खरीदी
भावांतर भुगतान योजना के तहत बुधवार से कृषि उपज मंडियों में प्याज की खरीदी शुरू होना थी लेकिन व्यापारियों का सरकारी खरीदी में रूझान न होने से मंडियों में खरीदी शुरू नहीं हो सकी, क्योंकि इस बार किसानों को राशि भुगतान की सुरक्षा के एवज में शासन ने खरीदी क्षमता के अनुसार राशि का फिक्स डिपाजिट (एफडी) मांगा था। इसी वजह से व्यापारियों ने प्याज की खरीदी में उत्साह नहीं दिखाया है।
मंडी सचिव ने बताया 10 हजार से लेकर व्यापारी की खरीदी क्षमता आधार पर एफडी जमा करना अनिवार्य किया है, ताकि किसानों को भुगतान में परेशानी होने पर संबंधित की एफडी से भुगतान किया जा सके, जबकि पिछले साल तक विपणन संघ के माध्यम से खरीदी हुई थी।
व्यापारी बोले- एफडी में अटक जाएंगे रुपए
व्यापारियों ने बताया एफडी की अनिवार्यता के कारण ही खरीदी के लिए उत्साह नहीं है। प्याज व्यापारी राजूभाई ने बताया 10-10 हजार रुपए एफडी में ही अटक जाएंगे, क्योंकि बड़े स्तर पर व्यापार नहीं करते हैं। ऐसे में छोटे व्यापारी होने से एफडी में रुपए अटकाने से कोई मतलब नहीं निकलेगा। उधर, मंगू पहलवान ने बताया नीलामी की कार्रवाई में हिस्सा लेंगे।
एफडी नहीं कराना चाहते व्यापारी, बोले- राशि अटकाने से अच्छा प्याज नहीं खरीदे
झंडा चौक स्थित सब्जी मंडी में बोरी में प्याज भरते व्यापारी।
जिले में 1148 किसानों ने कराया है पंजीयन
योजना में प्याज बेचने के लिए जिले में 1148 किसानों ने पंजीयन कराया है। जबकि शहर की कृषि उपज मंडी में 49 किसानों ने पंजीयन कराया है। मंडी सचिव सुमन बड़ोले ने बताया खरीदी के लिए पूर्व में व्यापारियों से आवेदन बुलाकर उन्हें लाइसेंस जारी किए थे। बावजूद खरीदी शुरू नहीं हो सकी। हालांकि खरीदी के लिए साप्ताहिक हाट बाजार के 3 और जिले की अन्य मंडियों में भी कुछ व्यापारियों को तैयार किया है। उन्होंने प्याज के समर्थन मूल्य को लेकर अब तक आदेश नहीं आने से भाव की स्थिति स्पष्ट नहीं है। हालांकि चर्चा के जरिए 8 रुपए किलो भाव होने की जानकारी मिली है।
बाहर की मंडियों में बेचा प्याज
भारतीय किसान संघ के पदाधिकारी मंशाराम पंचोले ने बताया एक माह देरी से प्याज की खरीदी शुरू की जा रही है। जिले में प्याज के भंडारण की व्यवस्था नहीं होने से किसानाें ने इंदौर की मंडी में 500 से 550 रुपए क्विंटल के भाव में प्याज बेचना पड़ा है। ऐसे में समय पर खरीदी शुरू होने से किसानों को भावांतर योजना का लाभ मिल सकता था। सरकारी खरीदी का इंतजार करने पर प्याज सड़ने की आशंका थी।
3200 हैक्टेयर प्याज का रकबा
इस साल जिले में 3200 हैक्टेयर में प्याज की बोवनी हुई थी। डीडीए उद्यानिकी अजय चौहान ने बताया पिछले साल 2347 हैक्टेयर में बोवनी हुई थी। उन्होंने बताया प्रति हैक्टेयर 25 टन प्याज का उत्पादन होता है।
भावनगर से हो रही प्याज की आवक
प्याज व्यापारी राजूभाई ने बताया फिलहाल गुजरात के भावनगर से प्याज की आवक हो रही है। थोक बाजार में प्याज की कीमत 5 से 6 रुपए किला है। जबकि ग्रेडिंग व क्वालिटी के अभाव में स्थानीय प्याज के दाम 4 से 5 रुपए किलो है।
व्यापारियों ने नहीं लिए लाइसेंस
खेतिया| कृषि उपज मंडी में बुधवार से भावांतर भुगतान योजना में प्याज की खरीदी शुरू नहीं हुई। मंडी समिति ने खरीदी के लिए प्रयास किए लेकिन सफलता नहीं मिली। मंडी सचिव एलएस सेनानी ने बताया व्यापारियों ने 10 से 14 मई के बीच योजना के तहत प्याज खरीदी के लिए मंडी समिति से लाइसेंस लेकर प्याज खरीदी का आश्वासन दिया था। किसी व्यापारी ने प्याज खरीदी के संबंध में रुचि नहीं दिखाई है। लाइसेंस भी नहीं लिया है। इससे खरीदी शुरू नहीं हुई।