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गाड़ गंगा नदी किनारे बसे खिलचीपुर में दिखती है राजस्थान की झलक, आज भी राजवंश के लोग रहते हैं महल में

3 वर्ष पहले
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राजगढ़|अपने रियासतकालीन रोचक व शौर्य से भरे किस्सों के लिए मशहूर है। यहां की तहसील खिलचीपुर असल में राजगढ़ व नरसिंहगढ़ से भी पुरानी रियासत है। अजमेर में ईसवी सन 784के खीची राजवंश की स्थापना करने वाले राजा मानिक राय व कनक राय के वंशजों ने खिलचीपुर में सदियों तक राज किया। असल में 474 साल पहले यानि सन 1544 में तत्कालीन राजा उग्रसेन खीची खिलचीपुर आए थे। जहां उन्होंने किला, महल सहित मंदिर और दूसरी इमारतें बनाई। चित्तौड़ के राजा राणा सांगा के भानजे पालण के बेटे थे। उनके वंशज अजमेर से जालौर और गढ़गागरौन होते हुए खिलचीपुर पहुंचे थे। जिले की अन्य रियासतों में खिलचीपुर ही ऐसी रियासत हैं, जहां अब भी राजवंश अपने पुराने महल में रह रहा है।

1787 में दीवान दीप सिंह ने दीपगढ़ बनाया, जिसे आज सोमवारिया कहा जाता है

प्रतापी राजा अमरसिंह ने यहां अमरेश्वर महादेव, अमर निवास, माता रातादेवी मंदिर, ऊंकारनाथ मंदिर, तोपखाना गेट, सरायं भवन और शहर कोट बनवाया था।

गाड़ गंगा नदी

707 किमी में फैली थी रियासत

283 गांव शामिल थे खिलचीपुर रियासत में

नरसिंहदेवजी का मंदिर

रघुनाथजी का मंदिर

वर्तमान में खिलचीपुर

18928 है यहां की आबादी

9601 है पुरुषों की आबादी

9327 है महिला आबादी

राजमहल

12747 लोग साक्षर हैं

5089 लोगों के पास है स्थाई रोजगार

664 अस्थाई रोजगार से जुड़े हैं

10543 लोग बेरोजगार हैं यहां

बड़े श्रीनाथजी का मंदिर

पटवा बाजार

कंटेंट : सत्येंद्र भारिल्ल

फोटो : मुकेश नामदेव

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