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वन विभाग में तबादलों को लेकर मचे बवाल के बाद नीति बनाने पर जोर

3 वर्ष पहले
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जयपुर | वन विभाग में वनरक्षकों के तबादलों के बाद मचे बवाल को लेकर समाधान नहीं निकला है। वनमंत्री गजेंद्र खींवसर ने इस बारे में हैड ऑफ द फॉरेस्ट एके गोयल से जानकारी मांगी है। हालांकि अभी तक वाइल्ड लाइफ के डिविजनों में खाली हुए पदों को भरने के रास्ते नहीं निकल पाए हैं। इस बीच अब मनमर्जी से होते आए तबादलों को लेकर सवाल उठे रहे हैं। क्योंकि अभी तक एक डिविजन से दूसरे डिविजन में स्थानांतरण करने संबंधित कोई नियम नहीं है। वनरक्षकों का चयन डिविजन स्तर पर किया जाता है। वहीं हर डिविजन अपने आप में एक कैडर होता है। यहां होने वाली भर्ती से पहले आवेदन के समय वनरक्षक सभी आयामों को जानकर ही आवेदन कर परीक्षा में भाग लेता है। ऐसे व्यक्ति विशेष को प्रलोभन, सिफारिश या निजी जरूरत आधार पर दिए जाने वाले तबादले कर दिए जाते हैं, वहीं ज्यादातर लोग इसमें सफल नहीं हो पाते। इसे देखते हुए तबादला नीति बनाने की सिफारिश हो रही है। चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन जीवी रेड्डी ने भी इसके पक्ष में सरकार को अवगत कराने की बात कही है।

तबादला नीति स्पष्ट नहीं होने से कई तरह की परेशानियां तो रहती है। इस बारे में सरकार को प्रस्ताव भेज रहे हैं, ताकि तबादलों में सबको समान अवसर सही नियमों की स्थिति स्पष्ट हो। -जीवी रेड्डी, चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन

तबादलों को लेकर जो भी उलझन या विवाद हैं, उनको सुलझाने के लिए होफ और चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन को बुलाया है। जल्द ही इस इस विषय का समाधान निकालेंगे। -गजेंद्र सिंह खींवसर, वनमंत्री

तबादला नीति में प्रस्तावित सुझाव

वन्यजीव संभाग से दूसरे संभाग में किए जाने वाले स्थानांतरण या प्रतिस्थापन आपसी सहमति के साथ हों।

वनरक्षकों का स्थानांतरण कम से कम 5 या अधिकतम साल से पहले नहीं हो।

वन्यजीव संभाग में काम की अधिकता के चलते स्वीकृत पदों में से 90 प्रतिशत स्टाफ होना जरूरी हो।

जहां अधिक कर्मचारी स्थानांतरण कराना चाहते हैं, वहां का विश्लेषण हो।

जिला-राज्य स्तरीय पुरस्कार प्राप्त कर्मचारियों के स्थानांतरण को नियमों से छूट रखी जाए, साथ ही प्राथमिकता भी मिले।

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