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अतिकुपोषित बच्चों की पहचान के लिए गंभीर रहने के निर्देश

3 वर्ष पहले
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किशनगंज. कार्यशाला में उपस्थित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता।

किशनगंज| समुदाय आधारित कुपोषण प्रबंधन कार्यक्रम के तहत ब्लॉक में दूसरे चरण में ब्लॉक के सभी गांवों में सीएम कार्यक्रम चलेगा। इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व आशाओं को कुपोषित बच्चों की पहचान के लिए गंभीर रहना हाेगा। यह बात मंगलवार को बीसीएमओ कार्यालय में आयोजित क्षेत्र के आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व आशाओं के प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान बीसीएमओ अभिषेक बंदवाला ने कही। एसीएफ की ओर से दूसरे चरण में कुपोषण के दंश को मिटाने के लिए ब्लॉक के सभी गांवों में समुदाय आधारित कुपोषण प्रबंधन कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इसमें अतिकुपोषित बच्चों की पहचान करने उनके रिकाॅर्ड का संधारण करने के लिए सभी को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसको लेकर मंगलवार को ब्लॉक के अलग-अलग सेक्टर से आई आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व आशाओं को ट्रेनर द्वारा प्रशिक्षण देते हुए अतिकुपोषित बच्चों की पहचान के बारे में जानकारी दी गई। इस दौरान सभी को पोषण कार्यक्रम के तहत अतिकुपोषित बच्चों में सुधार व लक्षण को लेकर सावधानियाें के बारे में भी बताया। इस दौरान सीएचसी प्रभारी डॉ. गिरिराज मीणा, डॉ. नरेश नागर, बीपीएम वरुण शर्मा, एसीएफ के राजेंद्र मालव समेत ब्लॉक से आई आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व आशाएं भी मौजूद थी।

केलवाड़ा| कस्बे में स्थित पीएचसी पर मंगलवार को आशा सहयोगिनी व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की एक दिवसीय कार्यशाला एसीएफ व फाइट हंकर फाउंडेशन की आेर से आयोजित की गई। जिसमें चिकित्साधिकारी डॉ. पायल अग्रवाल ने क्षेत्र के बच्चों में कुपोषण की जांच एवं उनके उपचार के लिए आवश्यक जानकारी दी। प्रशिक्षण संस्था के मुकेश मालव ने कुपोषण की परिभाषा समझाई। इस दौरान फाउंडेशन के विष्णु ओझा, जितेंद्र पांडे, आचार्य विश्वामित्र आर्य सहित आशा सहयोगिनी व कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

केलवाड़ा. कुपोषण के विरुद्ध प्रशिक्षण कार्यशाला में मौजूद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता।

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