पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • रोजाना एक टैंकर, कैसे बुझेगी लोगों की प्यास

रोजाना एक टैंकर, कैसे बुझेगी लोगों की प्यास

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
उपखंड क्षेत्र में पेयजल संकट गहराने से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को भीषण गर्मी के बीच पीने के पानी के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र के खाखरा ग्राम पंचायत के सुंडा चैनपुरा व लक्ष्मीपुरा गांव में पेयजल सप्लाई के लिए जलदाय विभाग ने टैंकर तो लगा दिया, लेकिन 24 घंटे के अंदर एक ही टैंकर के माध्यम से पेयजल की सप्लाई होने से समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।

टैंकर से पानी लेने के लिए लाइन में लगने के बाद नंबर आते-आते टैंकर का पानी ही समाप्त हो जाता है। इसके बाद कुछ लोगों को तो खाली बर्तन लेकर वापस लौटकर कल तक टैंकर आने का इंतजार करना पड़ता है। सुंडा निवासी हेमराज सहरिया व रामस्वरूप सहरिया ने बताया कि 24 घंटे में मात्र एक टैंकर सुबह के समय आता है। इससे पूर्ति नहीं हो पा रही है। आधे से ज्यादा लोगों का तो नंबर ही नहीं आता, उसके पहले ही टैंकर का पानी खत्म हो जाता है। इसी तरह खंडेला पंचायत के गांव डबका, गोदा में लगी पानी की टंकी के भी क्षतिग्रस्त होने से इसको भरने के बाद कुछ देर में ही पानी निकल जाता है। इस टंकी की मरम्मत कर दें तो ग्रामीणों को पेयजल समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। ग्राम विकास अधिकारी गौरव सिंह ने बताया कि सुंडा के लिए एक टैंकर और व लक्ष्मीपुरा की खराब पड़ी ट्यूबवैल में नई मोटर डालने का प्रस्ताव भेज रखा है । दोनों गांवों की व्यवस्था ठीक करवा दी जाएगी।

अल्प बारिश ने दिया स्वच्छता मिशन में दखल

शाहाबाद| क्षेत्र में अल्प बारिश के कारण कस्बे में हो रही अनियमित पानी की सप्लाई के चलते स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाए गए शौचालय अनुपयोगी साबित हो रहे हैं। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण कस्बे का जलस्तर तो पहले से ही कम है। ऐसे में जलस्रोतों से कम मात्रा में ही पानी मिल पा रहा है। वहीं सरकार की ओर से बनाए गए शौचालयों में अधिक पानी की जरूरत होने के कारण कस्बेवासियों को मजबूरी में खुले में शौच जाना पड़ रहा है। कस्बे के तुलसीराम धानुक, बुद्धिलाल धानुक ने बताया कि उनके नाम से अभी तक शौचालय का पैसा नहीं आया है और गरीब होने के कारण खुद शौचालय नहीं बनवा सकते हैं। जिसके कारण उन्हें खुले में ही शौच जाना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्र में भी देखा गया है कि शौचालय का निर्माण हो जाने के बाद भी ग्रामीण खुले में शौच जा रहे हैं। जबकि खुले में शौच नहीं जाएं, इसीलिए घर में ही शौचालय का निर्माण सरकार द्वारा किया जाता है। पानी की समस्या से जूझ रहे क्षेत्र के गांवों में जलदाय विभाग की आेर से टैंकर सुविधा उपलब्ध करवा दी गई है, लेकिन फिर भी इतना अधिक मात्रा में पानी नहीं मिल पाता है, जिससे शौचालय में शौच जा सकें। कस्बे की सहराना बस्ती के लोगों ने बताया कि सरकार की ओर से बस्ती में शौचालय बनाए गए हैं, कुछ शौचालय बनना बाकी हैं, लेकिन जिनके बन गए हैं उन्हें भी मजबूरी में खुले में शौच जाना पड़ रहा है। कस्बावासी राजकुमार शर्मा, सुदर्शन भार्गव, रघुवीरसिंह हाड़ा, निहाल सिंह तोमर, भरोसी ओझा, रतन कश्यप, प्रदीप वर्मा, परमानंद धानुक ने बताया कि पिछले 3-4 सालों से बारिश कम होने के कारण जलस्तर कम हो गया है। जिसके कारण हैंडपंप से भी केवल घरेलू उपयोग का पानी ही मिलता है।

शाहाबाद. पानी के अभाव में अनुपयोगी पड़े शौचालय।

उपखंड के खांखरा पंचायत के लक्ष्मीपुरा व चेनपुरा में टैंकर से सप्लाई शुरू हाेने के बाद भी लोगों को नहीं मिल रही राहत

किशनगंज. क्षेत्र के लक्ष्मीपुरा गांव में पानी के टैंकर का इंतजार करते ग्रामीण।

हैंडपंप व ट्यूबवेल नहीं, टैंकर ही एकमात्र विकल्प

ग्रामीणों का कहना है कि टैंकर सुबह के समय ही आ रहा है, लेकिन अगर प्रशासन चाहे तो सुबह व शाम टैंकर से सप्लाई शुरू कर दे तो लोगों को परेशानी ना हो। हीरालाल व गुलाब बाई ने बताया कि इन गांवों में सालभर पेयजल का संकट बना रहता है। इन गांवों में ना तो हैंडपंप है और ना ही बोरिंग। पूर्व में जो हैंडपंप थे उनका पानी सूख गया है। लक्ष्मीपुरा में भी एक टैंकर दो ही चक्कर करता है, उससे भी लोगों की पूरा पानी नहीं मिल रहा है।

गंदगी से अटी हैं नालियां, नहीं हो रही सफाई

बोहत | कस्बे के मध्य वार्ड एक गोलाणा में तीन वर्षों से सफाई नहीं होने से मांगरोल रोड के दोनों तरफ बनी नालियां गंदगी की अटी पड़ी हैं। वहीं कई जगह नालियां अतिक्रमण की भेंट चढ़ गई। वार्डवासी कस्तूरचंद सुमन, धनराज सुमन, शुभकरण सुमन आदि ने बताया कि नालियों की सफाई के लिए ग्राम पंचायत में शिकायत करने के बाद भी सफाई नहीं हो रही है। ग्राम पंचायत प्रशासन की आेर से उदासीनता का रवैया अपनाया जा रहा है। कहते हैं कि सफाई का बजट ही नहीं है। लोगों ने पंचायत प्रशासन से नालियों को अतिक्रमण मुक्त कर सफाई करवाने की मांग की है। वहीं सरपंच ओमप्रकाश सुमन व सचिव अशोक चौधरी ने बताया कि उक्त नालियाें की सफाई व रखरखाव की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी की है। वहां पर बनी नालियाें की सफाई करने का बजट उनके पास नहीं है। अगर अतिक्रमण जैसी कोई शिकायत है तो शीघ्र जांच कर अतिक्रमियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पीडब्ल्यूडी एईएन जीआर मीणा ने बताया कि वैसे तो ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी है, लेकिन फिर भी विभाग की ओर से समय-समय पर सफाई करवाई जाती है। कई जगह अतिक्रमी सफाईकर्मी को सफाई ही नहीं करने देते हैं। जिससे लंबे समय से नालियों की सफाई नहीं हो पा रही है।

हैंडपंप के आसपास गंदगी, लोग हो रहे परेशान

शाहाबाद |उपखंड मुख्यालय के सरकारी भवनों के आसपास लगे हैंडपंपों के आसपास गंदगी फैली रहती है। वहीं हैंडपंप के पास बनाई गई खेळ में भी गंदा पानी भरा रहता है। जबकि स्वच्छ भारत मिशन के तहत संबंधित विभाग के अधिकारी गांव-गांव जाकर स्वच्छता की अलख जगाने के लिए ढोल बजाकर लोगों को जागृत कर रहे हैं और इन्हीं आला अफसरों के सामने हैंडपंपों के आसपास गंदगी का अंबार लगा रहता है। खेळों में जमा गंदे पानी में मच्छर-मक्खी पैदा होने से बीमारियां फैलने का अंदेशा बन रहता है। हैंडपंपों के आसपास जमा गंदा पानी वापस हैंडपंप के हॉल में चला जाता है। उसी पानी को लोग दैनिक दिनचर्या में काम लेते हैं। इसकी जानकारी संबंधित विभाग के अधिकारियों को होने के बावजूद भी अनजान बने हुए हैं। कस्बे के फतेहचंद, ज्ञानी राठौर, बंटी जैन, गुलाबचंद, अखिलेश शर्मा, अनिल भार्गव, ललित कुमार, मुकेश कुमार, मुरारी लाल आदि ने बताया कि बाहर से अधिकारियों के पास लोगों का जमावड़ा लगा रहता है। वह लोग इन हैंडपंपों के पानी से ही प्यास बुझाते हैं। ध्यान नहीं देने से हैंडपंपों का पानी खराब होता जा रहा है। लोग मजबूरी में इन हैंडपंपों का पानी पी रहे हैं। लोगों ने संबंधित विभाग के अधिकारियों से सरकारी आवासों व कार्यालयों के आगे लगे हैंडपंपों पर साफ-सफाई कराने की मांग की है।

स्वास्थ्य केंद्र में पानी की किल्लत

कवाई| कस्बे में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में लगी ट्यूबवैल का जलस्तर गिरने से इन दिनों वह हवा फेंक रहा है। इसके चलते भीषण गर्मी में मरीजों व तीमारदारों को पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। यही नहीं अस्पताल प्रशासन परिसर में पेयजल की कमी बताते हुए डिलेवरी के लिए आ रही प्रसुताओं को बारां रैफर कर रहे हैं। इससे कर्मचारियों की मनमानी से शनिवार रात को भी परिजन भड़क गए। जिन्होंने अस्पताल में हंगामा कर दिया। अन्य कर्मचारियों ने समझाइश कर मामला शांत किया। शनिवार रात करीब साढ़े आठ बजे छबड़ा निवासी कविता प|ी कमलसिंह को 104 एंबुलेंस से अस्पताल लाया गया। यहां नर्सिंग स्टाफ ने अस्पताल में पेयजल की कमी बताते हुए पीड़िता को बारां रैफर कर दिया और कर्मचारियों ने लेबर रूम पर ताला लगा दिया। कर्मचारियों की इस मनमानी को देख परिजन भड़क गए। जिसमें कर्मचारियों को खरी-खोटी सुनाते हुए हंगामा कर दिया। अन्य कर्मचारियों ने समझाइश कर मामला शांत किया। साथ ही जलदाय विभाग का भुगतान नहीं करने से विभाग ने कनेक्शन काट दिया। चिकित्सा प्रभारी देवकीनंदन शर्मा ने बताया कि अस्पताल परिसर में पानी की कमी है। इस परेशानी से अधिकारियों व स्थानीय जनप्रतिनिधियों को अवगत करा दिया है। जल्द ही पेयजल व्यवस्था की जाएगी।

पानी की निकासी नहीं होने से कॉलोनीवासी परेशान

बारां | नगर परिषद के तेल फैक्ट्री क्षेत्र की रिद्धिका नगर कॉलोनी में लंबे अरसे से खाली पड़े प्लाॅटों में नालियों का पानी भरा हुआ है, जिसमें मच्छरों की भरमार है। जहरीले कीड़े रात के समय गुजरने वालों के पैरों में आ जाते हैं। जिनका मकानों के अंदर घुसने का भय रहता है। सीवरेज लाइन का काम पूरा होने के बाद भी नालियां मलबे से भरी हुई हैं तथा कई जगह से टूट गई हैं। पानी निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से खाली प्लाॅटों में काफी पानी जमा हो गया है। जिससे आसपास के निवासियों का जीना दूभर हो गया है। कॉलोनीवासी आशा कुमारी व अन्य महिलाओं ने बताया कि सामने के खाली प्लाॅटों में सालभर पानी भरा रहता है, जिनसे डेंगू व मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।

खबरें और भी हैं...