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वार्डों में एयर कंडीशनर, डीडीसी में दवाएं 43 डिग्री तापमान में

3 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज| मदनगंज-किशनगढ़

राजकीय यज्ञनारायण अस्पताल में प्रशाासन ने मरीजों को गर्मी के प्रकोप से बचाने के लिए इंतजाम किए गए हैं मगर दवाआें को गर्मी से बचाने के समुचित इंतजाम नहीं किए गए हैं। अस्पताल में जिन दवाओं को 8 से 25 डिग्री सेल्सियस में रखा जाना चाहिए उन्हें 40 से 43 डिग्री तापमान वाले दवा वितरण केंंद्रों पर रखा गया है जहां एसी तो दूर कूलर तक की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में दवाइयां खराब होने की आशंका है। दवा वितरण केंद्र ही नहीं बल्कि अस्पताल का सबसे केंद्रीय औषधि भंडार में भी दवाइयां खुली रखी हुई है। कहने को तो वहां चार फ्रिज है लेकिन इतनी अधिक संख्या में दवाइयां होने से फ्रिज की संख्या ना के बराबर है।

अस्पताल में पांच डीडीसी सेंटर है लेकिन वहां कूलिंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। दवा काउंटरों पर फ्रिज में दवाइयां रखी हैं लेकिन स्टॉक अधिक होने के कारण अधिकांश दवाइयां बाहर ही रखी हैं। दवा काउंटरों पर क्यूपिक सीरप, एलबेंडाजोल, एमोक्सिसीलिन आदि दवाइयों को अधिक नुकसान की आशंका बनी हुई है। अस्पताल में 200 से अधिक तरह की दवाइयां है इनमें से 80 से ज्यादा दवाइयां 25 डिग्री तक के तापमान में रखी होनी चाहिए।

निशुल्क काउंटरों के कूलर-फ्रिज से नहीं होती प्रॉपर कूलिंग, गर्मी के कारण दवाइयों के नुकसान होने का खतरा, फायदे की बजाय नुकसान का डर

राजकीय यज्ञनारायण अस्पताल में भीषण गर्मी में खुली पड़ी दवाइयां।

तप रहे हैं निशुल्क केंद्र

भीषण गर्मी के बीच तापमान 40 से 43 डिग्री के बीच रह रहा है। यज्ञनारायण अस्पताल सहित कस्बाई व ग्रामीण क्षेत्र के निशुल्क दवा केंद्र गर्मी से प्रभावित हो सकते है। अस्पताल के केंद्रीय औषधि भंडार में भी दवाइयां खुले में रखी हुई हैं। दवाइय ही नहीं बल्कि खुद मरीज भी तप रहे है। दवा वितरण केंद्रों के बाहर मरीजों की लंबी कतार लगी रहती है। पहले तो दवा वितरण केंद्र के बाहर छाया के लिए टेंट तक की व्यवस्था नहीं थी। लेकिन इन दिनों सामाजिक संगठनों की मदद से डीडीसी के बाहर टेंट लगा दिए गए है। लेकिन तेज गर्मी में मरीजों की हालत खराब हो जाती है।

बढ़ रहा तापमान बेकार कर सकता है दवाइयां

चिकित्सा सूत्रों के अनुसार दवाइयों के लिए निर्धारित तापमान पर ही स्टोर करना होता है। इसकी चेतावनी दवाइयों के रैपर पर दर्ज होती है। कुछ दवाइयों को 8 डिग्री तक का तापमान उपयुक्त रहता है। वहीं अधिकांश दवाइयां 25 डिग्री के तापमान पर सहेजनी होती है। अस्पताल में ऐसे कोई इंतजाम नहीं किए गए है।

ये हो सकता है नुकसान

जानकारों के अनुसार निर्धारित तापमान से अधिक तापमान में दवा रहने पर उसके खराब होने की संभावना बढ़ जाती है। दवाइयाें का असर कम होने के साथ ही वह जहर का काम करने लगती है। तेज गर्मी से दवा में फंगस आना, बदबू, संक्रमित होने की संभावना रहती है। गर्मी के कारण दवा की रोगांे से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है और वे सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है।

वार्डों में लगे है एेसी, पर दवा वितरण केंद्राें में अनदेखी

अस्पताल प्रशासन ने राजकीय यज्ञनारायण अस्पताल में एमआरएस की बैठक में केंद्रीय भंडारण में औषधियों/लैब रिजेंटर्स व टेस्टिंग कार्ड की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अस्पताल में चार ऐसी लगवाने की मांग की थी। पीएमओ ने तेज गर्मी में 8 डिग्री से 25 डिग्री के बीच रहने वाली दवाइयों के लिए एसी लगाने की मांग की थी। इस पर सभी ने सहमति जताई और अस्थायी व्यवस्था करने पर जोर दिया। इसके बाद अस्पताल में वार्डाें में ऐसी लगा दिए गए। लेकिन औषधि केंद्रों की अनदेखी की गई है।

दवा वितरण केंद्रों व औषधि केंद्र पर एसी होना चाहिए। कूलिंग की व्यवस्था की जा रही है। हालांकि कईं दवाइयां ऐसी है जिन्हे खतरा नहीं है पर कुछ दवाइयों को 8 डिग्री से 25 डिग्री के बीच रखा जाना अनिवार्य है। उनके खराब होने का डर है। इंतजाम के प्रयास किए जा रहे है। डॉ. पीसी पाटनी, डिप्टी कंट्रोलर, यज्ञनारायण अस्पताल

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