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बायो वेस्ट निस्तारण की गड़बड़ियां रोकने के लिए ऑनलाइन निगरानी

3 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज | मदनगंज-किशनगढ़

यज्ञनारायण अस्पताल सहित सीएचसी, पीएचसी से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण का किशनगढ़ व आसपास में प्लांट नहीं है। इस वजह से बायो वेस्ट को शहर से दूर निस्तारण के लिए भेजा जाता है। ऐसे में कई बार बायो वेस्ट निस्तारण में गड़बडियां सामने आती हैं। कई बार वाहन चालक बीच रास्ते में बायो वेस्ट डाल देते हैं। कई बार सड़क किनारे बायो वेस्ट मिलने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन लापरवाही से निपटने के लिए अब सरकार की ओर से ऑनलाइन मॉनिटरिंग की व्यवस्था की जाएगी। ताकि बायो वेस्ट के निस्तारण सही से हो सके।

जानकारी के अनुसार प्रदेश में सभी जगह पहली बार अस्पताल में से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट की ऑनलाइन मॉनिटरिंग होगी। बायो वेस्ट का अन्यत्र निस्तारण करते पकड़े जाने पर बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट और हैंडलिंग एक्ट 1998 संशोधित नियम 2016 में पांच साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इस संबंध में केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मेडिकल बायो वेस्ट निस्तारण एक्ट 1998 में संशोधन कर नया कानून बनाया है। इसके तहत अब प्रत्येक अस्पताल और पैथोलॉजी लैब को प्रदूषण नियंत्रण मंडल से अपने संस्थान का पंजीयन करवाना ही होगा। इसके बाद सरकार ने बायो वेस्ट की ऑनलाइन व्यवस्था की है। जयपुर मुख्यालय से बायो वेस्ट के निस्तारण के लिए सीसीटीवी कैमरे, जीपीएस और सेटेलाइट के जरिये निगरानी की जाएगी।

कितना बायो वेस्ट लेकर जा रहा है वाहन, सही निस्तारण कर रहा है या नहीं

यज्ञनारायण अस्पताल व पीएचसी, सीएचसी से निकलने वाले बायो वेस्ट को नगर परिषद की ओर से कचरा गाड़ी लेकर जाती है। तिरपाल ढककर उसे खुली जगह निस्तारण के लिए पहुंचाया जाता है। जुलाई से बायो वेस्ट वाहन में जीपीएस और सीसीटीवी से निगरानी होगी। कहीं रास्ते में वाहन रोककर बायो वेस्ट को फेंका तो नहीं जा रहा। क्योंकि बायो वेस्ट का निस्तारण आवश्यक होता है। अस्पताल में कितना बायो वेस्ट निकलना उस पर भी नजर रखी जाएगी।

विशेष बार कोड लगे कंटेनरों में होगा संधारण, गड़बड़ी पर 5 साल जेल

अब 4 तरह से होगा बायो वेस्ट का रखरखाव, पहले 10 तरह की थैलियों में रखना पड़ता था

अब पीली थैली में मानवीय ऊतक, खराब कटे हुए अंग, भ्रूण, गॉज, खून की थैलियां, शीशी में पैक खराब दवाएं आदि को रखा जाएगा।

लाल थैली में कैथेटर, मूत्र की थैलियां, बोतलें, सीरिंज, दस्ताने, टयूबिंग्स, इंट्रावीनस ट्यूब आदि का भंडारण किया जाएगा।

सफेद पारदर्शी प्लास्टिक कंटेनर में सूइयां, सूई लगी सीरिंज, स्काल्पेस ब्लेड, अंग काे काटने और सिलने के उपकरण, ब्लेड आदि।

नीला कार्ड बोर्ड बॉक्स में टूटा हुआ, दूषित कांच, औजार, दवा की खराब हुई एंप्यूलस आदि।

सुप्रीम कोर्ट और सरकार सख्त क्योंकि गंभीर बीमारियाें का खतरा व प्रदूषण रोकना जरूरी | बायो मेडिकल वेस्ट का नियमानुसार निस्तारण किया जाना मानव के लिए सही है। चिकित्सा संस्थान और अन्य संस्थाएं अपने स्तर पर ही बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण कर रहे हैं। इससे बायो वेस्ट उठाने वालों को गंभीर संक्रमण और जानलेवा बीमारियों का तो खतरा है ही। इसके साथ ही पर्यावरण को भी बहुत नुकसान हो रहा है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार इस मामले में गंभीर हैं।

मनुष्यों को गंभीर संक्रमण से बचाने और प्रदूषण रोकने के लिए की जा रही है सख्ती

अब 2 बार तुलेगा बायो वेस्ट, हर बार ऑनलाइन पता रहेगी मात्रा : अस्पताल से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट को दो बार तौला जाएगा। पहले अस्पताल से सीटीएफ प्लांट की गाड़ी बायो वेस्ट को तौलकर ही लेगा। इसके बाद सीटीएफ प्लांट में यह वेस्ट पहुंचने के बाद दोबारा तौला जाएगा। दोनों ही जगहों पर हुए तौल अपने आप थैली पर लगे बार कोड स्टीकर को स्कैन करते ही मात्रा भी पता चल जाएगी। इससे पता चल सकेगा कि वेस्ट अस्पताल से कितना निकला और प्लांट तक कितना पहुंचा।

अब अस्पताल व स्कूल प्रयोगशालाओं को भी करवाना होगा पंजीयन : नए नियम के तहत अस्पतालों, नर्सिंग होम, क्लिनिक, औषधालयों, पशु चिकित्सा संस्थानों, पशु गृह, पैथोलोजी लैब, ब्लड बैंक, आयुष अस्पताल, क्लिनिक स्थापनाओं, अनुसंधान और शैक्षणिक संस्थाओं, स्वास्थ्य शिविरों, चिकित्सा एवं शल्य चिकित्सा कैंपों, टीकाकरण कैंप, रक्तदान कैंप, स्कूलों के प्रथम चिकित्सा कक्ष, अदालती प्रयोगशालाओं और अनुसंधान प्रयोगशालाओं को बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना होगा।

बायो वेस्ट ट्रांसपोर्ट में परेशानी

नियमानुसार अस्पताल का बायोवेस्ट का अधिकतम 40-50 किलोमीटर की परिधि में निस्तारण करना चाहिए। रोजाना नियमानुसार निस्तारण के लिए वेस्ट भेजा जाता है। फिर भी ऑनलाइन मॉनिटरिंग से गड़बड़ियां पर अंकुश लगेगा। -डॉ. पीसी पाटनी, डिप्टी कंट्रोलर, यज्ञनारायण अस्पताल किशनगढ़

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