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समर्पण भाव से कथा सुनने पर ही मनुष्य का कल्याण

3 वर्ष पहले
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अजमेर रोड राधा सर्वेश्वर मंदिर परिसर पर पुरुषोत्तम मास में चल रही श्रीमदभागवत कथा के दूसरे दिन गुरुवार को कथावाचक संतोष शरण रसिक महाराज ने कई प्रसंगों पर प्रकाश डाला। कथावाचक ने कहा कि लोग मृत्यु के भय से इधर उधर भटक रहे हैं यह शाश्वत सत्य है। मृत्यु तो आनी है। इससे बचा नहीं जा सकता है। भव को पाना है तो भगवान के श्री चरणों में आना होगा।

उन्होंने कहा कि जब हम प्रसन्न चित भाव से समर्पण होकर कथा श्रवण करेंगे तो ही उद्धार संभव है। भागवत का एक एक शब्द पापों का शमन करने वाला है। श्रीमद भागवत तभी सफल होगी जब हम सदचितमन से समर्पित होकर भावों से श्री हरि के चरणों में बिछ जाते हैं उनके लिए भगवान भी बिछा रहता है। पूछो भक्त गजराज से, ध्रुव से, प्रहलाद से, जब कथावाचक ने बसा लो संसार नैतिकता का, संस्कार बनते जाएंगे, आओगे श्री हरि के पास सब काम संवरते जाएंगे तो भक्त नृत्य करने लगे। प्रहलाद शर्मा, नंद साहू, गणेश सैन, हेमराज साहू सहित अन्य ने आरती कर कथा को विश्राम दिया। कथा प्रारंभ से पूर्व तुलसीराम साहू परिजनों के साथ कथावाचक सहित श्रीमदभागवत की पूजा अर्चना विधि विधान से की।

मदनगंज किशनगढ़. राधा सर्वेश्वर मंदिर में चल रही श्रीमदभागवत कथा में मौजूद भक्त।

भक्तों की जानो महिमा रे, समय बड़ा बलवान है

पुरुषोत्तम मास के शुभारंभ पर पुराना शहर माहेश्वरी भवन पर श्रीमदभागवत ज्ञान कथा का आयोजन बुधवार से शुरू हुआ। कथा के दूसरे दिन वृंदावन निवासी बाल व्यास पंडित ऋषभ कृष्ण शास्त्री ने परीक्षित जन्म, सुखदेव पूजन, विदुर चरित्र सहित अन्य प्रसंगों पर कथा कही। बाल व्यास ने कहा कि मौत से कोई भाग नहीं सकता, सुख चाहने वालों को दुखों से गुजरना पड़ता है। विदुर की भक्ति में इतना भाव था कि श्री हरि छप्पन पकवान छोड़ सूखा साग खाने आ गए। भक्तों की जानो महिमा रे समय बड़ा बलवान है। तुम्ही गाओ कान्हा कान्हा रे समय बड़ा बलवान है। इस दौरान भगवान शिव, माता गौरी व बाबा नंदी की नयनाभिराम झांकी बनाई गई। श्रीमद भागवत की आरती कर कथा को विश्राम दिया गया।

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