बंगाखलार पंचायत भवन में वन पट्टा के मुद्दे पर झारखंड वनाधिकार मंच और समर्पण की ओर से रविवार को जिला स्तरीय सेमिनार का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि जिप अध्यक्ष शालिनी गुप्ता ने कहा कि इस इलाके में ग्रामीणों एवं आदिवासियों के प्रयास से जंगल संरक्षित और संवर्धित है। इसके बावजूद वन अधिकार कानून के तहत जमीन की मान्यता नहीं मिलना एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि वन पट्टा एवं अन्य बुनियादी सवालों को सरकार तक पहुंचाने की जरूरत है। झारखंड वनाधिकार मंच के केंद्रीय सदस्य रामदेव विश्वबंधु ने कहा कि आदिवासी समाज जंगल को परिसंपत्ति नहीं वरन धरोहर और संस्कृति का द्योतक समझती है। आदिवासी और जंगल का गहरा संबंध रहा है।
आदिवासी एवं अन्य परंपरागत वन निवासियों को वन भूमि का पट्टा दिलाने को लेकर ग्राम सभा को आगे आने की जरूरत है। वहीं अरूण कुमार शर्मा ने कहा कि माइका और अन्य खनिज संसाधन की मौजूदगी के बावजूद लोगों का पलायन और बाल श्रम होना बड़ी विडंबना है। जिप सदस्य शांति प्रिया ने शिविर के माध्यम से वन पट्टा देने की अपील की। कार्यक्रम को समर्पण के सचिव इंद्रमणि साहू, विश्वनाथ राय, मुखिया सुशीला देवी, चंद्रेश्वर भुइयां ने भी संबोधित किया। विषय प्रवेश शंकर लाल राणा ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुखिया विष्णु देवी व धन्यवाद ज्ञापन शिवशंकर राय ने किया। सेमिनार के उपरांत समस्याओं पर आधारित नाटक प्रस्तुत किया गया। मौके पर रंग कर्मी ओमप्रकाश साव, दिनेश कुमार, नीलम शर्मा, रोहित कुमार, गौरी, बीरबल महतो, रोहित मंडल, ललिता कुमारी, पिंकी देवी, मुनारिक कुमारी, मेरियन, उमेश, वसंती देवी, ज्योति, नूतन, संतोष कुमार आदि मौजूद थे।
लोगों को संबोधित करती शालिनी गुप्ता।