दलित उत्पीड़न संघर्ष समिति जिला इकाई ने सुप्रीम कोर्ट के एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के निर्देश को वापस लेने, भारत बंद के दौरान प्रदर्शनकारियों पर किए गए मुकदमा को वापस लेने सहित अन्य मांगों पर समाहरणालय के समक्ष सोमवार को एक दिवसीय धरना दिया। धरना के पूर्व कोडरमा बाजार से जुलूस निकाला गया, जो रांची-पटना मुख्य मार्ग होते हुए समाहरणालय पहुंचकर धरना में तब्दील हो गई।
जुलूस में शामिल प्रदर्शनकारियों मांगों के समर्थन में नारेबाजी कर रहे थे। धरना को संबोधित करते हुए जिप सदस्य महादेव राम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इच्छा शक्ति के अभाव में सुप्रीम कोर्ट में 20 मार्च को एससी, एसटी एक्ट में संशोधन करने का काम किया गया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के महाधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र दायर कर एससी, एसटी एक्ट का दुरुपयोग होने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि एससी, एसटी में दिए गए संशोधन के निर्देश पर रोक लगने तक आंदोलन जारी रहेगा। सभा की अध्यक्षता करते हुए मनोज रजक ने 2 अप्रैल को भारत बंद के दौरान आंदोलनकारियों पर किए गए झूठे मुकदमे को वापस लेने की मांग की। सभा को समिति के कार्यवाहक संयोजक प्रेमप्रकाश रजक, प्रकाश रजक, रामबालक चौधरी, प्रकाश अंबेडकर, डा. कैलाश प्रसाद, राजेश पासवान, बाजो दास, आेम प्रकाश दास, रामचंद्र राम, संजय दास, जगदीश दास, गणेश दास, दुर्गा प्रसाद राम, मनोज चौधरी, जनकदेव राम, अमर रजक, विनोद दास, महेश रजक, कैलाश रजक ने भी संबोधित किया।
कार्यक्रम का संचालन रामबालक चौधरी ने की। सभा के बाद राष्ट्रपति के नाम सात सूत्री मांगों का एक स्मार पर उपायुक्त को सौंपा गया। मौके पर चूलहन राम, धीरज दास, मंगलदेव, कुमार रजक, अरविंद दास, रंजीत दास, सकिंद्र कुमार, मोहन दास, प्रमोद पासवान, मधु कुमारी, ममता कुमारी, सरिता देवी सहित अन्य लोग मौजूद थे।