लंजोड़ा में वैद्यों के सम्मेलन के समापन के अवसर पर मौजूद अफसर।
पारंपरिक वैद्यों के सम्मेलन में शामिल हुए कलेक्टर
कोंडागांव| जिले में आज भी कई जड़ी बूटियां पाई जाती है, जिसका प्रयोग बीमारियों से निजात पाने के लिए क्षेत्र के लोग वर्षों से करते आ रहे है। अब इस पहचान को व्यापक करते हुए यहां की दुर्लभ देशी जड़ी बूटियाें के प्रचार-प्रसार के लिए एक कार्य योजना तैयार की जाएगी। स्थानीय समुदाय द्वारा वनौषधियों के संग्रहण के लिए युवाओं को रोजगार दिया जाएगा। वहीं देशी जड़ी बूटियों से कुपोषण को दूर भी किया जाएगा।
यह बातें कलेक्टर नीलकंठ टीकाम ने शनिवार को ग्राम लंजोड़ा में सीजीनेट स्वर मोबाइल रेडियो जन पत्रकारिता के तत्वावधान में आयोजित पारंपरिक वैद्यों के सम्मेलन के समापन अवसर पर कही। उन्होंने कहा दुर्लभ वनस्पतियों की जानकारी का संकलन प्रकाशित करने की भी कोशिश की जाएगी, ताकि अन्य जिलों के लोग भी इसका लाभ उठा सके। जिले में कुपोषण जैसे समस्या एवं अन्य व्याधियों जैसे डायबिटीज, मलेरिया, डायरिया, मौसमी बीमारियों के रोकथाम के लिए देशी जड़ी बूटियां एवं काढ़े का प्रयोग सदियों से स्थानीय समुदाय करता आ रहा है। लोग जड़ी बूटियाें का महत्व समझें और इसका उपयोग कर बच्चों को बीमारियों व कुपोषण से दूर रखें, इसलिए यह सम्मेलन आयोजित किया गया। इस अवसर पर अन्य जिलों से आए वैद्यराजों ने अपने-अपने क्षेत्र की चिकित्सा पद्धतियों एवं जड़ी बुटियों के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में सहायक आयुक्त जीएस सोरी, वैद्य हरिसिंह सिदार, डाॅ. एचडी गांधी, भावसिंह कश्यप, फजल मोहम्मद एवं गायत्री परिवार लंजोड़ा के सदस्य और ग्रामीण बड़ी संख्या मौजूद थे।