- Hindi News
- National
- अस्पतालों में सुविधाएं कम, सीएमडी को पत्र लिखकर व्यवस्था सुधारने की मांग
अस्पतालों में सुविधाएं कम, सीएमडी को पत्र लिखकर व्यवस्था सुधारने की मांग
कोयला उत्पादन में एसईसीएल के जिले में स्थित कोयला खदानों का विशेष योगदान है। इसके भरोसे ही कोल इंडिया अपने टारगेट तक पहुंची है। लेकिन एसईसीएल के विभागीय अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं में तेजी से कमी आई है। जिसने कर्मचारियों की परेशानी बढ़ा दी है।
बीमार कर्मचारी व उसके परिजन इलाज के लिए निजी अस्पतालों के चक्कर काटने मजबूर हैं। पिछले कुछ वर्षो के दौरान एसईसीएल से मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं में कमी आई है। कर्मचारी हमेशा यह शिकायत करते है कि उन्हें मजबूरी में िनजी अस्पताल में इलाज कराना पड़ता है। विधायक जयसिंह अग्रवाल ने इस संबंध में एसईसीएल सीएमडी बीआर रेड्डी को पत्र लिखकर विभागीय अस्पताल, डिस्पेंसरी में विशेषज्ञ चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाप सहित अन्य जरूरी उपकरण जल्द से जल्द उपलब्ध कराने की मांग की है।
एसईसीएल कर्मी बोले- मजबूरी में हमें इलाज के लिए निजी अस्पताल जाना पड़ रहा
मुख्यालय से रैफर करने से समस्या बढ़ने लगी: जिले में कोरबा, कुसमुंडा, दीपका व गेवरा परियोजना में करीब 17 हजार अधिकारी व कर्मचारी है। एसईसीएल को मिलने वाले टारगेट का 100 एमटी से ज्यादा कोयला जिले से मिलता है। पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर कर्मचारियों को औपचारिकता के सिवाए कुछ नहीं मिल रहा। पहले कर्मियों को जहां बीमार पड़ने पर स्थानीय अस्पतालों में रिफर कर दिया जाता है।
एचसीएच व मुड़ापार कोरबा है मेन अस्पताल: जिले में एसईसीएल के प्रमुख अस्पताल मुड़ापार मेन अस्पताल कोरबा ,मानिकपुर अस्पताल कोरबा ,एसईसीएल अस्पताल बलगी, बांकी मोंगरा एसईसीएल हास्पिटल, एसईसीएल कुसमुंडा हास्पिटल, एसईसीएल गेवरा एनसीएच व अन्य प्रमुख अस्पताल है। कई डिस्पेंसरी भी संचालित है। इन अस्पतालों में कोयला कर्मी व उनके परिवार वालों को पहले जैसे चिकित्सा सुविधा नहीं मिल रही है।
अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी: एसईसीएल के जिले में स्थित विभागीय अस्पतालों में पहले से ही विशेषज्ञ डॉक्टरों कमी है। इसके अलावा 2-3 साल के भीतर कई डॉक्टर रिटायर हो जाएगे। जिससे परेशानी और बढऩे की संभावना है। अस्पतालों में स्त्री रोग विशेषज्ञ, दंत रोग विशेषज्ञ सहित अन्य बीमारियों का इलाज करने वाले विशेषज्ञ डॉक्टरों की भी कमी है। लेकिन वर्तमान में डाक्टरों की कमी से समस्या बढ़ते जा रही है। हालही में कोयला कंपनी ने डाक्टरों के रिटायरमेंट की उम्र 65 वर्ष तक कर दी है। लेकिन इससे भी राहत नहीं है।