आंगनबाड़ी की भर्ती में देरी, परियोजना अधिकारी मनोज अग्रवाल का वेतन रोका
कलेक्टर मो. कैसर अब्दुल हक ने महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यों की मंगलवार को समीक्षा की। उन्होंने कोरबा शहरी परियोजना में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं की भर्ती प्रक्रिया लंबे समय से पूर्ण नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई। कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शहरी परियोजना अधिकारी मनोज अग्रवाल का वेतन भर्ती प्रक्रिया पूर्ण होने तक रोकने के निर्देश जिला कार्यक्रम अधिकारी दिए।
कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में कलेक्टर सभी दस परियोजना-कोरबा शहरी, कोरबा ग्रामीण, कटघोरा, करतला, बरपाली, पाली, हरदीबाजार, पोंड़ीउपरोड़ा, चोटिया, पसान के तहत रिक्त आंगनबाड़ी, कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं की भर्ती प्रक्रिया के प्रगति की समीक्षा की। कलेक्टर ने परियोजना अधिकारियों को पारदर्शी तरीके से भर्ती प्रक्रिया मई के दूसरे सप्ताह तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने जिले में निर्माणाधीन व स्वीकृत आंगनबाड़ी भवन की समीक्षा की। उन्हाेंने कहा कि विभाग के अधिकारी ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। इसलिए दिनोंदिन हालात बिगड़ रहे हैं।
जिले की सभी 10 परियोजनाओं में काम ठीक नहीं होने पर जताई नाराजगी
कलेक्टोरेट में कलेक्टर मो. कैसर अब्दुल हक ने की महिला बाल विकास विभाग के कार्यों की समीक्षा।
परियोजना अधिकारी सीईओ के साथ समन्वय बनाकर करें काम पूरा
उन्होंने स्वीकृत आंगनबाड़ी भवन का कार्य प्रारंभ नहीं होने व अधूरा निर्माण पर सभी परियोजना अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने जनपद सीईओ के साथ समन्वय बनाकर कार्य पूर्ण करने कहा। कलेक्टर ने विभाग के सभी अधिकारियों को आंगनबाड़ी केंद्रों के सुचारू संचालन के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों का नियमित निरीक्षण करने व नियमानुसार कार्य करने के निर्देश दिए। किसी प्रकार की लापरवाही पाए जाने कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी। बैठक में महिला बाल विकास अधिकारी आदित्य शर्मा सहित सभी परियोजना अधिकारी उपस्थित थे।
कलेक्टर ने कहा- विभाग के अधिकारी खुद आंगनबाड़ी पहुंचकर देखें सामग्री
कलेक्टर मो. कैसर अब्दुल हक ने जिला कार्यक्रम अधिकारी आनंद प्रकाश क्रिस्पोट्टा को विभाग की आेर से आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए खरीदे गए सामानों की सूची परियोजनावार उपलब्ध कराने कहा। उन्होंने सूची अनुसार आंगनबाड़ी केंद्रों में सामग्री पहुंची है या नहीं इसकी जांच स्वयं आंगनबाड़ी केंद्रों में पहुंचकर करने की बात कही है। गौरतलब है कि जिले की कई आंगनबाड़ियों में बच्चों के लिए पहुंचाया जाने वाला सामान पहुंचता ही नहीं हैं। विभागीय कर्मचारियों की उदासीनता का खामियाजा आंगनबाड़ी के बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। इस संबंध में कई बार शिकायतें भी आ चुकी है, लेकिन अफसर जांच नहीं कर रहे।