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90 के बाद एक सीट से आगे नहीं बढ़ पाई भाजपा

3 वर्ष पहले
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मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह तीन दिन में दूसरी बार रविवार को कोरबा जिले में होंगे। भाजपा के मिशन 65 के लिए कोरबा जिला बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां सन 77 व 90 की जनता लहर के बाद कभी भी भाजपा एक से अधिक सीट नहीं जीत पाई।

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने शुक्रवार को रामपुर विधानसभा क्षेत्र के करतला में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि इस बार हम कोरबा जिले की सभी चारों सीटें जीतेंगे। दरअसल 1977 व 1990 में जनता लहर के समय जब कांग्रेस हर जगह हार रही थी तब भी कटघोरा से कांग्रेस के बोधराम कंवर जीते थे। इस समय जनता पार्टी थी और रामपुर से ननकीराम कंवर व तानाखार से विशाल सिंह को सफलता मिली थी। 2008 में परिसीमन में एक सीट कोरबा की बढ़ गई। चार सीट होने के बाद भी भाजपा एक ही सीट जीत पाई। कोरबा सीट बनने के बाद से ही कांग्रेस के जयसिंह अग्रवाल विधायक है।

कोरबा में भाजपा की गुटबाजी सदैव पार्टी के लिए नुकसान का कारण बनती रही है। अभी भी टिकट को लेकर अनेक दावेदार है। जोगेश लांबा को महापौर रहते हुए पार्टी ने विधानसभा की सीट दी थी, मगर वे हार गए। पिछले लोकसभा चुनाव में डॉ. बंशीलाल महतो को जहां उनका दीर्घ राजनीतिक अनुभव व संबंध काम आए वहीं विकास महतो ने असल आधार में जमीनी काम किया। अभी जनसंपर्क यात्रा में भी वे प्रमुख संयोजनकर्ता रहे हैं। पार्टी के एक नेता बताते हैं कि जो चेहरे यहां पर जाने-पहचाने हैं उन्हें अजमाया भी जा चुका है। ऐसे में कोई नया चेहरा भी खासकर के कोरबा से उतारा जा सकता है। कोरबा के पूर्व कलेक्टर व तीन दिन पहले ही राज्य प्रशासनिक सुधार आयोग के सदस्य पद से इस्तीफा देने वाले राजपाल सिंह त्यागी का नाम भी तेजी से सामने आया है। वैसे पार्टी के अन्य नेता उन्हें पैराशूट उम्मीदवार के तौर पर देख रहे हैं। जाहिर है यदि उन पर दांव खेला जाता है तो बाकी सारे नेता पूरे दिल से तो उनका साथ नहीं ही देंगे।

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तानाखार विधानसभा क्षेत्र जहां से केवल 1977 में विशाल सिंह और उसके बाद 1985 में तब भाजपा में रहे हीरा सिंह मरकाम जीते थे। मरकाम ने गोंडवाना गणतंत्र पार्टी बना ली। तीन दिन पहले पेण्ड्रा में हुई राहुल गांधी की सभा में वे मंच पर थे। साफ है कांग्रेस के साथ उनकी पार्टी तालमेल कर रही है। जिले में यूं देखा जाए तो तानाखार ही एक ऐसा क्षेत्र है जहां भाजपा के पास कोई जाना-पहचाना चेहरा नहीं है। इस बार छजकां के मैदान में होने के कारण सभी सीटों पर त्रिकोणीय संघर्ष होना तय है।

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