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डीएमएफ फंड से बनना था अंडरब्रिज, सर्वे के बाद रेलवे ने क्राॅसिंग फ्री करने योजना बता रोका काम
शहर में स्टेशन से लेकर कुसमुंडा व सीएसईबी चौक तक आधा दर्जन से ज्यादा रेलवे क्रासिंग है। इन क्रासिंग से मालगाड़ी कोयला लेकर गुजरती है। जिससे अक्सर फाटक बंद होते रहते हैं। इससे लोगों को परेशानी होती है।
सबसे ज्यादा दबाव संजय नगर क्रासिंग पर रहता है। जहां से स्टेशन समेत पुराने शहर की ओर जाने वाले अधिकांश लोग आवाजाही करते हैं। वहीं गेवरा-दीपका व कुसमुंडा खदान से निकले कोयले की ट्रांसपोर्टिंग के लिए 24 घंटे मालगाड़ी चलती हैं। इस व्यस्तम क्रासिंग से संजयनगर क्रासिंग पर पैदल चलने वालों के साथ दोपहिया-चारपहिया व अन्य यात्री वाहन फंस जाते हैं। खासकर स्टेशन जाने वाले यात्री परेशान होते हैं। एक साल पहले जिला प्रशासन ने संजय नगर क्रासिंग पर अंडर ब्रिज बनाने पहल की थी। नगर निगम को सर्वे कर योजना तैयार करने की जिम्मेदारी मिली थी। निगम ने राइर्ट्स से रेलवे क्रासिंग पर सर्वे भी कराया। पर याेजना बनती इससे पूर्व 3 माह पहले रेलवे के अधिकारियों ने आगे की प्रक्रिया रुकवा दी। अधिकारियों ने तर्क दिया कि रेलवे की मानिकपुर से लेकर सर्वमंगला मंदिर के बीच 4 क्रासिंस को बंद करके अंडरब्रिज बनाने की योजना है। बताया गया इसके लिए रेलवे नई टेक्नालॉजी इस्तेमाल करेगा, जिससे कम लागत व कम समय पर अंडरब्रिज तैयार हो जाएंगे।
रेलवे अफसरों ने कम लागत व चंद घंटे में अंडर ब्रिज तैयार करने लेटेस्ट टेक्नालॉजी इस्तेमाल करने कहा
शहर में कॉसिंग के जाल के कारण अक्सर फाटक बंद रहने से लोग जाम में फंसे रहते हैं।
प्रशासन को जमीन की कीमत चुकानी पड़ती
रेलवे के नियमों के अंतर्गत रेलवे ट्रैक के आसपास उसके दायरे की जमीन का कोई दूसरा विभाग उपयोग नहीं कर सकता। ऐसे में प्रशासन या निगम अंडर ब्रिज के लिए खुदाई करता तो उसके एवज में रेलवे को जमीन की कीमत चुकानी पड़ती। भले ही कार्य जनहित का होता लेकिन रेलवे व्यवसायिक नजरिए से कीमत वसूलता।
माइनिंग फंड से आरयूबी का निर्माण करना था: एक प्रशासनिक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जिला प्रशासन ने डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड से संजय नगर क्रासिंग पर अंडर ब्रिज बनाने की तैयारी की थी। राइट्स के सर्वे के बाद प्रपोजल तैयार किया जाता। जिसमें लागत व अन्य तकनीकी जानकारी होते। लेकिन रेलवे के अड़चन की वजह से योजना बनने से पहले प्रक्रिया अटक गई।
हर 10 मिनट में होता है फाटक बंद: संजय नगर क्रासिंग शहर में सबसे व्यस्त है। स्टेशन से गेवरा रोड स्टेशन के बीच मालगाड़ियों के लगातार आवाजाही से हर 10 मिनट पर क्रासिंग का फाटक बंद होता है। कई बार अप-डाउन दोनों दिशा में मालगाड़ियों को गुजारने पर 15-20 मिनट तक लगातार फाटक बंद रहता है। फाटक के ज्यादा देर बंद से लोग फंसे रहते हैं। यात्रियों के स्टेशन पहुचंने पहले उनकी ट्रेन छूट जाती है।
फाटक से 10 हजार लोग रोज गुजरते हैं: शहर समेत उपनगरीय क्षेत्रों से स्टेशन या चांपा की ओर जाने लोगों को ट्रांसपोर्टनगर से पावर हाऊस रोड की ओर होते हुए जाना पड़ता है। रेलवे ओवर ब्रिज घुमावदार होने की वजह से ज्यादातर लोग व वाहन सुनालिया चौक से संजय नगर क्रासिंग होते गुजरते हैं। दोपहिया, चारपहिया समेत अन्य यात्री वाहन में करीब 10 हजार लोग इस क्रासिंग से गुजरते हैं।
जल्दबाजी के चक्कर में लगता है जाम: वाहन चालकों में संजय नगर क्रासिंग पर फाटक बंद होने के दौरान वहां से गुजरने की जल्दीबाजी रहती है। इस चक्कर में दोपहिया समेत चार पहिया व आटो चालक रॉग साइड में वाहन खड़ी कर देते हैं। जिससे फाटक खुलने के बाद दोनों ओर के वाहन एक-दूसरे के सामने आ जाते हैं और जाम लग जाता है। जाम हटने में ही 5 से 10 मिनट लग जाते हैं।
मंडल मुख्यालय करेगा निर्णय: कोरबा रेलखंड के क्षेत्रीय प्रबंधक आदित्य गुप्ता ने बताया कि संजय नगर रेलवे क्रासिंग के साथ शहर में 2 अन्य क्रासिंग पर अंडरब्रिज का प्रस्ताव है। जिस पर निर्णय मंडल मुख्यालय को लेना है। निर्माण प्रक्रिया कहां तक आगे बढ़ पायी है इस संबंध में उनके पास कोई अपडेट नहीं है।