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बायोमेट्रिक हाजिरी का मामला श्रम न्यायालय में, प्रबंधन 28 को रखेगा अपना पक्ष
कोरबा। खदान में काम करने वाले कर्मियों को बायोमेट्रिक का प्रावधान लागू किए जाने के खिलाफ श्रम न्यायालय में मामला विचाराधीन है। प्रबंधन को अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष रखना था, लेकिन किसी कारण से सुनवाई नहीं हो सकी। अब न्यायालय ने मामले की सुनवाई के लिए 28 मई की तिथि निर्धारित की है।कोल इंडिया में सभी कंपनियों में कार्यरत कर्मियों के लिए बायोमेट्रिक प्रणाली से हाजरी लागू करने का सर्कुलर जारी किया था। िजसका पालन सभी कंपनियों मंे शुरू हो गया है। एसईसीएल मुख्यालय ने भी निर्देश जारी कर 15 मई से बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य रूप से लगाए जाने पर ही वेतन बनाए जाने का फरमान दिया था। सीटू के महासचिव वीएम मनोहर, एटक के वरिष्ठ नेता दीपेश मिश्रा व एचएमएस नेता एके विश्वास की ओर से बायोमेट्रिक हाजिरी खिलाफ पहले से ही श्रम न्यायालय में याचिका दायर किया गया है। यूनियनों के अनुसार न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के बाद भी प्रबंधन ने आदेश जारी कर बायोमेट्रिक को अनिवार्य कर दिया गया था। इस पर श्रमिक नेताओं ने आपत्ति जताते हुए श्रम न्यायालय में आवेदन कर आदेश पर स्थगन जारी करने की मांग की। श्रम न्यायालय ने यूनियन प्रतिनिधियों का तर्क सुनने के पश्चात प्रबंधन के आदेश पर स्थगन लगाते हुए कहा कि एसईसीएल में कार्यरत कर्मियों की अनुपस्थिति न लगे सके व उन्हें आर्थिक नुकसान न हो। इस कारण आगामी आदेश तक बायोमेट्रिक मशीन के साथ ही उपस्थिति रजिस्टर में भी दर्ज की जाएगी। प्रबंधन को अपना पक्ष रखने के लिए 16 मई की तिथि निश्चित की गई थी। सीटू के महासचिव वीएम मनोहर के अनुसार श्रम न्यायालय में किसी कारण से मामले की सुनवाई बुधवार को नहीं हो सकी। न्यायालय ने अब 28 मई की तिथि निर्धारित की है। जिसमें सुनवाई के बाद आगे कार्रवाई की जाएगी। यूनियनोंे का कहना है कि प्रबंधन के एकतरफा निर्णय से श्रमिकों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।