कोरबा। कुसमुंडा थाना अंतर्गत नवागांव निवासी कुलंजन सिंह कंवर वर्ष 2010 में निजी काम से तहसील कार्यालय में गया था। जहां दीपका थाना अंतर्गत विजयनगर के धनुहारपारा निवासी जनुक दीवान (40) पिता अनंद दास से हुई थी। जनुक दास ने खुद को एक चैनल का पत्रकार बताया था। साथ ही रायपुर मंत्रालय में अपनी पहचान होना बताकर कई लोगों को नौकरी दिलाने का झांसा दिया। उसे कम रकम खर्च करने पर स्वयं व रिश्तेदारों को नौकरी लगवाने को तैयार किया। जिस पर कुलंचन सिंह ने नगदी व बैंक खाता में जमा करते हुए डेढ़ लाख रुपए दिया था। वहीं इसके बाद नवागांव के सूर्यभवन सिंह, रामायण सिंह, महिपाल सिंह, ज्ञान सिंह, रतन सिंह, व एक युवती उमा शंकर ने मिलकर नौकरी पाने के लिए 5 लाख रुपए जनुक दीवान को दिया था। लेकिन उनकी नौकरी नहीं लगी। संपर्क करने पर वह गुमराह करता रहा। धोखाधड़ी के शिकार कुलंजन सिंह समेत अन्य पीड़ितों ने कुसमुंडा थाना में रिपोर्ट लिखाई थी। मामलेे में पुलिस ने जुर्म दर्ज करते हुए आरोपी की गिरफ्तारी की थी। मामला न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी रविन्दर कौर के कोर्ट में विचाराधीन था। जहां सुनवाई के दौरान आरोपी जनुक दीवान के खिलाफ धारा 419 भादवि में दोष सिद्ध नहीं हुआ। वहीं 420 भादवि में दोष सिद्ध होने पर मजिस्ट्रेट ने 1-1 वर्ष सश्रम कारावास व 3-3हजार अर्थदंड की सजा सुनाई है।