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कटघोरा उपजेल की व्यवस्थाओं में बदलाव, मिला आईएसओ सर्टिफिकेट

3 वर्ष पहले
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बेहतर रखरखाव व सुविधाएं बढ़ाते हुए सुधार गृह के रूप में तैयार किए गए कटघोरा उपजेल को आईएसओ सर्टिफाइड घोषित किया गया है। आईएसओ 9001-2015 सर्टिफाइड बनने के बाद अब इस जेल में लगातार सुविधाएं बढ़ानी होगी। दरअसल कुछ साल पहले तक कटघोरा उपजेल भी सामान्य जेल की तरह थी। लेकिन जेलर मुकेश कुशवाहा ने उपजेल में अपनी पदस्थापना के बाद प्रशासनिक अनुमति लेकर बंदियों के लिए एजुकेशन, हेल्थ समेत स्किल डेवलमेंट कार्यक्रम शुरू किया। इसके साथ ही बंदियों के मनोरंजन के लिए सभी बैरक में एलईडी टीवी, इनडोर गेम्स का किट उपलब्ध कराया। जेल के भीतर बंदियों के लिए 10 बिस्तर का अस्पताल तैयार कराया। स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम में इलेक्ट्रिशियन, मेशन, प्लंबर समेत स्वरोजगार के लिए अन्य ट्रेड में बंदियों को ट्रेनिंग देना शुरू किया गया। जेल में इस बदलाव का पॉजीटिव असर बंदियों में भी होने लगा है। बंदियों का व्यवहार व दिनचर्या सुधर रही है।

नशे के आदी बंदियों की लत छुड़ाने के लिए जेल के भीतर ही नशा मुक्ति केंद्र की शुरुआत

स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम और नशा मुक्ति केंद्र

उपजेल में बंदियों के सुधार के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। इसके तहत एक तरफ उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने (स्वरोजगार) के लिए स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम चलाया जा रहा है। जिससे प्रशिक्षण के बाद बंदी जेल से छूटकर अपना व्यवसाय शुरू करने लगे हैं। वहीं नशे के आदी बंदियों की लत छुड़ाने के लिए जेल के भीतर ही नशा मुक्ति केंद्र खोला गया है। जहां बंदियों की नशे की आदत छूट जाती है।

वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हेाती है पेशी और सुनवाई

उपजेल के बंदियों को अब पेशी व सुनवाई के दौरान कोर्ट नहीं भेजा जाता है। बल्कि जेल के भीतर से ही वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बंदी कोर्ट में अपनी हाजिरी लगाते हैं। इससे एक तो बंदियों को कोर्ट ले जाने पुलिस बल नहीं लगाना पड़ता है। इससे बंदियों के भागने की आशंका भी नहीं रहती है। दूसरी ओर उनके आने-जाने में लगने वाला शासन का खर्च व समय दोनों बच जाते हैं।

कटघोरा उपजेल आईएसओ सर्टिफाइड घोषित।

कटघोरा उपजेल की बंदी क्षमता 148, यहां बंदियों की संख्या 156

कटघोरा उपजेल की बंदी क्षमता 148 है। जबकि यहां बंदियों की संख्या 156 है। इस तरह उपजेल में क्षमता से 8 बंदी अधिक हैं। सभी विचाराधीन हैं। इनमें से आधे स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग ले रहे हैं। जेल में ट्रेनिंग लेकर छूटे कई बंदी अब स्वयं की दुकान खोलकर स्वरोजगार या दूसरे के यहां काम करने परिवार को चलाते हुए समाज की मुख्यधारा से जुड़ गए है।

सुधारगृह की परिकल्पना हो रही सार्थक

कटघोरा उपजेल के जेलर मुकेश कुशवाहा के मुताबिक जेल में बेहतर प्रबंधन के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा, भोजन व साफ-सफाई पर जोर देते हुए बंदियों के लिए सुविधाओं का इजाफा किया गया। जो आईएसओ के मानक के अनुरूप थी। आईएसओ की टीम ने इसके लिए निरीक्षण करके आईएसओ सर्टिफाइड किया है। जेल से छूटने वाले बंदियों के आचरण में सुधार आ रहा है जिससे जेल में सुधारगृह की परिकल्पना सार्थक हो रही है।

उपजेल में बंदियों को मिल रही हैं यह सुविधाएं

अस्पताल

गार्डन

आरओ वॉटर स्टेशन

सभी बैरक में एलईडी टीवी

स्किल डेवलमेंट प्रोग्राम

वीडियो कांफ्रेंसिंग

खेलकूद मैदान

इनडोर गेम्स

नशामुक्ति केंद्र

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