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5 ट्रैक व 4 प्लेटफार्म वाले उरगा स्टेशन में ओवरब्रिज नहीं, ट्रेन आने पर मालगाड़ी के नीचे से निकलते यात्री

3 वर्ष पहले
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ट्रेनों का सर्वाधिक दबाव कोरबा व गेवरारोड के बाद उरगा रेलवे स्टेशन पर रहता है। मड़वारानी मंे देवी मंदिर होने के कारण रेलवे ने वहां एफओबी (फुट ओवर ब्रिज) बना दिया। वहां 2 प्लेटफार्म के बीच 3 रेल लाइन है। जबकि उरगा में 4 प्लेटफार्म के बीच 5 रेल लाइन बिछी है। प्लेटफार्म भी महज दिखावे के लिए हैं क्योंकि वहां अक्सर मालगाड़ी खड़ी रहती हैं। जबकि यात्री ट्रेनों को बीच के ट्रैक पर अक्सर ठहराव दिया जाता है। इससे यात्रियों को स्टेशन में ट्रेन पकड़नी या लौटना हो तो मालगाड़ी के नीचे से पार होना पड़ता है। कोरबा से चांपा के बीच 5 स्टेशन हैं। इसमें एक मड़वारानी स्टेशन पर वर्ष 2015 में 3 अप्रैल को फुटओवर ब्रिज (एफओबी) की कमिश्निंग की गई थी। उसके बाद से ही अन्य स्टेशनों पर भी एफओबी बने मांग उठने लगी थी। जिला चेंबर ऑफ कामर्स के साथ-साथ जिले के जनप्रतिनिधियों ने भी एफओबी के लिए डिवीजन व जोन के अफसरों से मांग करते रहे हैं। मड़वारानी में एफओबी बनने के बाद रेल प्रशासन ने भी क्रमवार शेष बचे स्टेशनों पर निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजने की बात करते रहे थे। इसके लिए कोरबा रेलखंड में पदस्थ रहे एआरएम अवधेश त्रिवेदी ने भी यहां से एक प्रस्ताव बनाकर डिवीजन को भेजे थे। उनके स्थानांतरण के बाद प्रक्रिया थम सी गई थी।

यात्री ट्रेनों को भी प्लेटफार्म के स्थान पर बीच ट्रैक पर दिया जाता है ठहराव

1 व 2 के बीच 2 नंबर ट्रेक पर खड़ी पैसेंजर ट्रेन।

हर समय बनी रहती है दुर्घटना की अाशंका

रेलखंड के जो चार स्टेशन अब तक बिना एफओबी के हैं उनके साथ कई गांव के लोगों के लिए सुगम साधन हंै। लोग पैदल अथवा अपने साधन से स्टेशन पहुंचते हैं। जहां अक्सर यह स्थिति बनती है कि उनकी ट्रेन विपरीत दिशा में प्लेटफार्म पर खड़ी है या फिर बीच वाले रेलवे ट्रैक पर। ऐसे में बच्चों अौर बूढ़ों के साथ लोग मालगाड़ी के नीचे जान जोखिम में डालकर पार करने मजबूर होते हैं।

साइडिंग की तरह उपयोग होते हैं सभी रेलवे स्टेशन

कोरबा से चांपा के बीच पड़ने वाले पांचों रेलवे स्टेशन पर यात्री ट्रेन तो तय समय के बाद आगे बढ़ जाती है,लेकिन कोयला लदी अथवा खाली मालगाड़ी को सभी स्टेशनों पर अक्सर खड़ा कर दिया जाता है। जिसमें अधिकांश खाली होती हैं। ऐसा इसलिए भी किया जाता है क्योंकि कोल साइडिंग में जगह नहीं होती। कोल साइडिंग में जगह नहीं मिलने पर बीच के स्टेशनों पर मालगाड़ियों को रोक कर रखा जाता है।

बोर्ड को अब भेजा गया है प्रस्ताव मंजूरी का इंतजार

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर जोन के जीएम सुनील सिंह सोइन ने वर्ष 2018-19 की कार्ययोजना में उरगा समेत जिले के 5 स्टेशनों को भी एफओबी के लिए शामिल किया है। चिन्हांकित स्टेशनों में उरगा, सरगबुंदिया, कोथारीरोड व बालपुर का प्रस्ताव बनाकर फंड की मंजूरी के लिए बोर्ड को भेजा गया है। एफओबी निर्माण व फंड की मंजूरी मिलने पर ही कमिशनिंग की प्रक्रिया पूर्ण हो पाएगी। यह पूरा होगा या नहीं इसमें अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।

रेलवे स्टेशन से हर 5 से 10 मिनट में गुजरती हैं ट्रेनें

इस रूट पर हर 5 से 10 मिनट में एक गुड्स ट्रेन गुजरती है। कोई कोयला ले जाती हैं तो कोई कोयला लेने के लिए आती हैं। वहीं अधिकांश मालगाड़ियों को उरगा रेलवे स्टेशन पर रोक दिया जाता है। सिगनल होने तक वहीं खड़ी रहती हंै। 5 ट्रैक वाले उरगा का 3 ट्रैक पर मालगाड़ी खड़ी रहती हैं।

घंटो बाद मिलता सिग्नल

अधिकांश मालगाड़ियों को उरगा रेलवे स्टेशन पर रोक दिया जाता है। घंटों सिगनल नहीं मिलने तक वहीं खड़ी रहती हंै। 5 ट्रैक वाले उरगा का 3 ट्रैक पर सदैव मालगाड़ी खड़ी रहती हैं। इसके चलते भी मालगाड़ी के नीचे से निकलने पर यात्रियों की जानमाल का खतरा बना रहता है।

जोन के रेल बजट में है शामिल

क्षेत्रीय प्रबंधक आदित्य गुप्ता ने बताया कि उरगा व 4 अन्य स्टेशनों को भी एफओबी के लिए चिन्हांकित किया गया है। बजट सत्र 2018-19 में शामिल हैं। मंजूरी के लिए बोर्ड को भेजा गया है। बजट की मंजूरी मिलते ही एफओबी बनने लगेगा। रेलवे ने यहां के साथ 19 अन्य स्टेशनों को भी चिन्हांकित किया है।

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